जांजगीर‑चांपा। जिले में कानून व्यवस्था अब कमजोर पड़ता दिख रहा है। आरोप है कि जहां एक ओर ग्रामीणों, गरीबों और आम नागरिकों पर पुलिस का रौब खुलेआम दिखता है, वहीं संगीन मामलों के आरोपी बेखौफ सड़कों पर घूम रहे हैं। कोतवाली थाना प्रभारी (टीआई) द्वारा ऐसे ही एक गंभीर आरोपी को फ़रार बताया जाना अब शहर में चर्चा का विषय बन गया है, क्योंकि वही आरोपी कथित तौर पर एसपी साहब से कार्यालय जाकर आत्मीय मुलाकात कर रहा हैं।
सूत्रों के अनुसार, जिन मामलों में सख़्त कार्रवाई अपेक्षित थी, वहां फाइलें ठंडे बस्ते में डाल दी गईं। पुलिस पर आरोप है कि शिकायत लेकर थाने पहुंचने पर उन्हें घंटों बैठाया जाता है, उलटे सवाल-जवाब कर डराया जाता है, जबकि प्रभावशाली आरोपी को संरक्षण मिलता है। यह दोहरा मापदंड न केवल पुलिस की साख पर सवाल उठाता है, बल्कि न्याय व्यवस्था पर भी गहरा आघात है।
शहर में चर्चा है कि कोतवाली थाना अपने ही टीआई के नियंत्रण से बाहर है। जिन आरोपियों पर संगीन धाराएं हैं वे खुलेआम घूम रहे हैं यह स्थिति पुलिस प्रशासन की कार्यक्षमता और निष्पक्षता दोनों पर प्रश्नचिह्न लगाती है। लोग पूछ रहे हैं कि अगर आरोपी फ़रार है तो फिर वह सार्वजनिक रूप से अधिकारियों से कैसे मिल रहा है?
इन आरोपों के बीच जांजगीर चांपा पुलिस की भूमिका पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं। जिले में कानून-व्यवस्था की स्थिति और पुलिस-प्रशासन की जवाबदेही तय करना अब जरूरी हो गया है। जनता की मांग है कि निष्पक्ष जांच हो, जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही तय की जाए और कानून का राज बहाल किया जाए ताकि गरीब और ग्रामीण को भी वही न्याय मिले, जो रसूखदारों को मिल रहा है।
