धमतरी। छत्तीसगढ़ राज्योत्सव के मंच पर जब पारंपरिक वेशभूषा में सजे बुजुर्गों के कदम लोकगीतों की धुन पर थिरके, तो पूरा पंडाल तालियों की गड़गड़ाहट से गूंज उठा। समाज कल्याण विभाग के मार्गदर्शन में जननी सेवा संस्थान, अर्जुनी द्वारा संचालित ‘सियान गुड़ी’ (डे-केयर सेंटर) के वरिष्ठ नागरिकों ने अपनी सामूहिक प्रस्तुति से यह साबित कर दिया कि कला, उमंग और लोकसंस्कृति किसी उम्र की मोहताज नहीं होती।
सोमवार देर शाम आयोजित इस सांस्कृतिक संध्या में वरिष्ठजनों ने छत्तीसगढ़ की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत का जीवंत ताना-बाना पेश किया। प्रस्तुति के दौरान सुआ नृत्य, गौर-गौरी नृत्य और राउत नाचा के पारंपरिक रूपों का खूबसूरत संगम देखने को मिला। उम्र के इस पड़ाव पर भी बुजुर्ग कलाकारों की ऊर्जा, मंच पर उनका सटीक तालमेल और चेहरे की मुस्कान ने वहां मौजूद हर दर्शक को मंत्रमुग्ध कर दिया।
इस मनमोहक प्रस्तुति में रामकुंवर साहू, बिसाहिन देवांगन, लछवनतिन साहू, यशोदा साहू, गीता साहू, रेणुका केशरवानी, कावला कौशल, विष्णु प्रसाद, अशोक साहू, ढेलू राम साहू, सुशील केशरवानी, जगदेव साहू, भागीरथी साहू, बाबूलाल साहू, रेमुन साहू, राम बाई और शशिप्रभा दुबे जैसे वरिष्ठ कलाकारों ने बढ़-चढ़कर भाग लिया। वहीं, इस आयोजन को सफल बनाने में जननी सेवा संस्थान की सहयोग अध्यक्ष अन्नपूर्णा (अश्विनी) गजेंद्र के साथ दिव्या साहू, दानवीर गजेंद्र, उमराव साहू, सती सेन, दुलारी पटेल, तुलसी साहू, चैतांशु राजा, दिव्य प्रकाश गजेंद्र, कुणाल देवांगन, प्रशांत साहू और घनेंद्र चक्रधारी का सक्रिय योगदान रहा।
कार्यक्रम के संयोजक और सियान गुड़ी के सदस्य शेष नारायण गजेंद्र ने बताया कि इस केंद्र की मूल भावना वरिष्ठ नागरिकों को सामाजिक, सांस्कृतिक और रचनात्मक गतिविधियों से जोड़कर उन्हें एक सक्रिय व उल्लासपूर्ण जीवन देना है। उन्होंने कहा कि मंच पर उतरकर अपनी कला प्रस्तुत करने से बुजुर्गों का न केवल आत्मविश्वास मजबूत होता है, बल्कि समाज के प्रति उनका जुड़ाव भी गहरा होता है। राज्योत्सव के इस मंच पर वरिष्ठजनों का यह अदम्य उत्साह आज की नई पीढ़ी के लिए एक सशक्त और प्रेरणादायी संदेश बन गया।
