धमतरी। बंगाल की खाड़ी से उठे ‘मुरासु’ चक्रवात ने धमतरी जिले के अन्नदाताओं के माथे पर चिंता की गहरी लकीरें खींच दी हैं। अभी किसान पिछले दिनों आए ‘अर्णब’ चक्रवात की भारी बारिश से हुए नुकसान से पूरी तरह उबर भी नहीं पाए थे कि मंगलवार सुबह से आसमान में उमड़ते काले बादलों और बीती शाम हुई बूंदाबांदी ने एक बार फिर संकट की घंटी बजा दी है। जिले के चारों विकासखंडों धमतरी, कुरुद, मगरलोड और नगरी में कई खेतों में तैयार धान की फसलें पहले ही गिरकर पानी में सड़ चुकी हैं, वहीं अब मौसम के दोबारा बिगड़ते मिजाज ने बची-खुची फसल पर भी आफत ला दी है।
जिले में खरीफ धान की कटाई जोर-शोर से चल रही है, वहीं जिन किसानों ने देर से बुवाई की थी, उनकी फसल भी खेतों में पककर पूरी तरह तैयार खड़ी है। ऐन कटाई के समय बेमौसम बारिश होने से न सिर्फ उत्पादन गिरने की आशंका है, बल्कि बालियों के गीले होने से उनमें कालापन और फफूंद जनित बीमारियों का खतरा भी बढ़ गया है। इससे उपज की गुणवत्ता और बाजार भाव दोनों पर सीधा प्रतिकूल असर पड़ेगा।
स्थानीय किसान भागीराम साहू, प्रकाश जांगड़े और मदन लाल साहू का कहना है कि मौसम ठीक से खुला ही नहीं था कि मुरासु का दबाव सक्रिय हो गया। उनका साफ कहना है कि यदि अब दोबारा तेज बारिश हुई, तो खेतों में खड़ी और खलिहानों में कटी पड़ी दोनों ही फसलों को बचा पाना नामुमकिन हो जाएगा। फिलहाल प्रशासनिक स्तर पर नुकसान का आकलन जारी है, लेकिन किसान टकटकी बांधे आसमान के साफ होने की प्रार्थना कर रहे हैं।
