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बलरामपुर। एक तरफ जहां पूरा प्रदेश राज्योत्सव के उल्लास और रोशनी में डूबा हुआ था, वहीं दूसरी ओर अपनी लंबित मांगों को लेकर आंदोलन कर रहे राजस्व पटवारियों ने निलंबन आदेशों की प्रतियां जलाकर शासन के खिलाफ आर-पार की जंग का ऐलान कर दिया। छत्तीसगढ़ राजस्व पटवारी संघ का अनिश्चितकालीन आंदोलन अब प्रशासनिक सख्ती और कर्मचारियों के आक्रोश के बीच एक बेहद संवेदनशील मोड़ पर पहुंच चुका है। बातचीत और समाधान की जगह निलंबन व कारण बताओ नोटिस की कार्रवाई से नाराज पटवारियों का साफ कहना है कि दमनकारी कदमों से उनका आंदोलन रुकने वाला नहीं है।
पीवी ऐप की व्यावहारिक व तकनीकी विसंगतियों, वर्षों से अटकी वेतन विसंगति और राजस्व निरीक्षक (आरआई) पद पर पदोन्नति की राह देख रहे पटवारी 13 अक्टूबर से कलमबंद हड़ताल पर हैं। आंदोलन के बीच प्रशासनिक सख्ती का आलम यह है कि संभागायुक्त नरेंद्र दुग्गा ने सरगुजा संभाग के सभी छह जिलों के एसडीएम को हड़ताल पर गए पटवारियों को तत्काल कर्तव्य पर लौटने हेतु नोटिस जारी करने के निर्देश दिए हैं, जिसके तहत अकेले बलरामपुर जिले के 150 पटवारियों को कारण बताओ नोटिस थमाया जा चुका है। इसके साथ ही वाड्रफनगर, रामानुजगंज और कुसमी क्षेत्र में सिलसिलेवार निलंबन की कार्रवाइयों ने आग में घी डालने का काम किया है।
इस गतिरोध का सबसे गंभीर असर सीधे तौर पर किसानों और आम जनता पर पड़ रहा है। पटवारियों के धरने पर चले जाने से वर्तमान में चल रही धान गिरदावरी, डिजिटल क्रॉप सर्वे और नामांतरण-बंटवारा जैसे महत्वपूर्ण राजस्व कार्य पूरी तरह ठप हो गए हैं। तहसील अध्यक्ष सुरभि दास और जिलाध्यक्ष धीरेंद्र उर्मालिया के अनुसार, पीवी ऐप में आ रही दिक्कतों का समाधान फील्ड स्तर के लॉगिन में उपलब्ध ही नहीं है, जिससे किसानों की समस्याओं का निदान नहीं हो पा रहा है।
साथ ही, पदोन्नति के अभाव में पटवारी के रूप में सेवा शुरू कर उसी पद से सेवानिवृत्त होने की विवशता कर्मचारियों में लंबे समय से गहरा असंतोष पैदा कर रही है। फिलहाल एक तरफ प्रशासन की कड़ी चेतावनी और दूसरी तरफ कर्मचारियों की अडिग मांग के चलते हालात तनावपूर्ण बने हुए हैं।
