सड़क मरम्मत से लेकर स्वास्थ्य, शिक्षा और पेयजल तक समस्याओं की लंबी फेहरिस्त, अधिकारियों को समय-सीमा में काम पूरा करने की नसीहत
जांजगीर-चांपा। जिले में विकास कार्यों और शासकीय योजनाओं की जमीनी हकीकत क्या है, यह किसी से छिपा नहीं है। सड़कों की बदहाली, स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता, आंगनबाड़ी केंद्रों की स्थिति, पेयजल की समस्या और सरकारी योजनाओं के क्रियान्वयन को लेकर लगातार सवाल उठते रहे हैं। इन सबके बीच शुक्रवार को सांसद कमलेश जांगड़े की अध्यक्षता में आयोजित दिशा समिति की बैठक में एक बार फिर अधिकारियों को योजनाओं का लाभ शत-प्रतिशत हितग्राहियों तक पहुंचाने और विकास कार्य समय-सीमा में पूरा करने के निर्देश दिए गए।
बैठक में प्रधानमंत्री आवास योजना, जल जीवन मिशन, स्वास्थ्य, शिक्षा, महिला एवं बाल विकास, सड़क निर्माण, विद्युत आपूर्ति और स्वच्छ भारत मिशन सहित कई विभागों की समीक्षा हुई। दिलचस्प बात यह है कि जिन समस्याओं के निराकरण के निर्देश पहले भी दिए जाते रहे हैं, वे मुद्दे एक बार फिर बैठक की कार्यसूची में शामिल रहे।
सड़कों की मरम्मत के निर्देश, लेकिन सवाल यह कि आखिर कब सुधरेंगी सड़कें?
सांसद ने खराब सड़कों की शीघ्र मरम्मत कराने और दुर्घटनाजन्य स्थलों पर संकेतक लगाने के निर्देश दिए। सवाल यह है कि जब सड़कों की बदहाली और ब्लैक स्पॉट की जानकारी विभागों को है, तो अब तक सुधारात्मक कार्रवाई का इंतजार क्यों करना पड़ रहा है?
स्वास्थ्य सेवाओं पर समीक्षा, लेकिन व्यवस्था पर निगरानी कितनी?
स्वास्थ्य विभाग को बेहतर सेवाएं देने और जीवनदीप समिति की नियमित बैठक करने के निर्देश दिए गए। वहीं जिले में स्वास्थ्य सुविधाओं की गुणवत्ता, अस्पतालों की व्यवस्था और मरीजों को मिलने वाली सेवाओं की वास्तविक स्थिति भी निगरानी की मांग करती है।
आंगनबाड़ी और स्कूलों की बदहाली पर फिर निर्देश
जर्जर आंगनबाड़ी भवनों की मरम्मत, स्कूलों में शौचालय और पेयजल व्यवस्था तथा मध्यान्ह भोजन की गुणवत्ता सुनिश्चित करने को कहा गया। लेकिन सवाल यह है कि इन बुनियादी सुविधाओं के लिए बार-बार निर्देश देने की नौबत क्यों आ रही है?
बैठक में विधायक व्यास कश्यप सहित अन्य जनप्रतिनिधियों ने भी क्षेत्रीय समस्याएं उठाईं। अब असली परीक्षा अधिकारियों की है। बैठक में दिए गए निर्देशों पर कितनी कार्रवाई होती है, कितने लंबित काम पूरे होते हैं और आम जनता को कितना लाभ मिलता है, इसका जवाब अगली समीक्षा बैठक में सामने आना चाहिए। क्योंकि जिले को केवल बैठकों में विकास के निर्देश नहीं, बल्कि जमीन पर विकास के परिणाम चाहिए।
