धमतरी। गंगरेल बांध के अथाह जल में खड़े होकर अपने हक की गुहार लगा रहे डूब प्रभावितों के सब्र का बांध आखिरकार टूट चुका है। छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय के स्पष्ट आदेश के छह साल बीत जाने के बाद भी जब पुनर्वास और भूमि आवंटन की फाइलें दफ्तरों से बाहर नहीं निकलीं, तो प्रभावित परिवारों ने 12 अक्टूबर से बरदिहा लेक व्यू रिसोर्ट के पीछे बांध के पानी में उतरकर अनिश्चितकालीन जल सत्याग्रह शुरू कर दिया।
आंदोलन के तीसरे दिन बुधवार को हालात उस वक्त गंभीर हो गए जब पानी में लगातार खड़े रहने के कारण नौ आंदोलनकारियों लक्ष्मी बाई पटेल, हलार मरकाम, इंदल सिंह नेताम, कृपाराम सिन्हा, पुरुषोत्तम मंडावी, शम्भू राम सिन्हा, राजकुमारी वारडे एवं चन्द्रहास मंडावी की तबीयत अचानक बिगड़ गई। मौके पर बुलाई गई 108 एंबुलेंस सेवा के जरिए सभी को तुरंत जिला अस्पताल पहुंचाया गया, जहां उनका उपचार चल रहा है।
साथियों की गिरती सेहत के बावजूद आंदोलनकारियों के तेवर और कड़े हो गए हैं। प्रदर्शनकारियों का साफ कहना है कि जब तक शासन-प्रशासन उच्च न्यायालय के आदेश का पूरी तरह पालन करते हुए पात्र परिवारों को जमीन आवंटित करने की ठोस और प्रभावी पहल नहीं करता, तब तक यह लोकतांत्रिक व शांतिपूर्ण जल सत्याग्रह जारी रहेगा। आंदोलन के उग्र रूप और प्रदर्शनकारियों की बिगड़ती सेहत ने प्रशासनिक महकमे में हलचल तेज कर दी है।
आनन-फानन में जिला प्रशासन ने डूब प्रभावित परिवारों के लंबित भूमि आवंटन और पुनर्वास प्रकरणों की निष्पक्ष जांच के लिए अपर कलेक्टर की अध्यक्षता में पांच सदस्यीय जांच समिति का गठन किया है। वहीं संघर्ष समिति ने प्रशासन से स्पष्ट मांग की है कि जांच की आड़ में प्रक्रिया को और न खींचा जाए तथा सत्याग्रह स्थल पर तत्काल आपातकालीन चिकित्सा सुविधाएं और स्वास्थ्य सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए जाएं।
