जांजगीर-चांपा। आस्था, शक्ति और उपासना का महापर्व ‘शारदीय नवरात्रि’ इस वर्ष 11 अक्टूबर से प्रारंभ होकर 20 अक्टूबर तक श्रद्धा व उल्लास के साथ मनाया जाएगा। ज्योतिषीय गणना के अनुसार, इस बार घटस्थापना रविवार को होने से जगतजननी मां दुर्गा का आगमन गजराज यानी हाथी पर हो रहा है। देवी भागवत के अनुसार माता का हाथी पर सवार होकर आना ज्ञान, वैभव, शांति और कृषि संपन्नता का स्पष्ट संकेत माना जाता है, जिससे आगामी वर्ष में उत्तम वर्षा और बेहतर फसलों के योग बनते हैं।
धर्माचार्य पंडित अतुल कृष्ण द्विवेदी के अनुसार, सनातन पंचांग में वर्ष भर में चार नवरात्रि आती हैं दो प्रत्यक्ष (चैत्र व शारदीय) और दो गुप्त नवरात्रि। आश्विन मास की यह प्रत्यक्ष नवरात्रि जन-जन के बीच विशेष महत्व रखती है, जिसमें नौ दिनों तक शक्ति स्वरूपा मां दुर्गा के नौ अलग-अलग रूपों का विधि-विधान से पूजन किया जाता है। पंडित द्विवेदी बताते हैं कि इन पावन दिनों में दुर्गा सप्तशती का पाठ अत्यंत कल्याणकारी सिद्ध होता है। शास्त्र सम्मत विधि से किया गया यह अनुष्ठान साधक की कार्यसिद्धि, संतान सुख, आरोग्य और वैभव की प्राप्ति में सहायक बनता है।
नवरात्रि के प्रथम दिन घटस्थापना और पावन अखंड ज्योति प्रज्वलन के लिए सूर्योदय के उपरांत प्रातः 6:00 बजे से 8:00 बजे तक की समयावधि अत्यंत फलदायी है। किसी कारणवश प्रातः पूजन न कर पाने वाले श्रद्धालु दोपहर के शुभ अभिजीत मुहूर्त (सामान्यतः 11:45 बजे से 12:40 बजे तक) में कलश स्थापना कर सकते हैं। स्थानीय पंचांग भेद के अनुसार समय में आंशिक परिवर्तन संभव है, किंतु गज पर माता का यह आगमन संपूर्ण समाज के लिए मंगलकारी सिद्ध होगा।
