अम्बिकापुर। जल संसाधन विभाग की कथित लापरवाही और निर्माण में बरती गई तकनीकी खामियों की पोल पहली ही बड़ी बारिश ने खोल दी है। सीतापुर ब्लॉक अंतर्गत ग्राम पंचायत भिठुवा में मांड नदी पर लगभग चार करोड़ रुपये की सरकारी लागत से बना एनीकट नदी के उफान में ताश के पत्तों की तरह भरभराकर ढह गया। एनीकट के केवल दो-तीन पिलर ही बचे हैं, जबकि शेष ढांचा नदी के तेज बहाव में तिनके की तरह बह गया। इस घटना के बाद स्थानीय किसानों में भारी आक्रोश है और उन्होंने निर्माण में हुए भ्रष्टाचार की उच्चस्तरीय जांच की मांग की है।
कमजोर नींव और घटिया निर्माण ने ली बलि
वर्षों पहले इस एनीकट का निर्माण किसानों को साल भर सिंचाई की सुविधा देने और उनकी आर्थिक स्थिति सुधारने के मकसद से किया गया था। स्थानीय ग्रामीणों जगमोहन, मंदीप और विजय का आरोप है कि निर्माण के समय ही तय मानकों की अनदेखी की गई थी। नींव की गहराई जानबूझकर कम रखी गई, जिससे ढांचे की जमीनी पकड़ बेहद कमजोर थी। यही वजह रही कि नदी का जलस्तर बढ़ते ही एनीकट दबाव बर्दाश्त नहीं कर सका। ग्रामीणों के अनुसार, पूर्व में भी यह बांध क्षतिग्रस्त हुआ था, लेकिन विभाग ने मूल समस्या को दूर करने के बजाय केवल लीपापोती कर मरम्मत की औपचारिकता पूरी कर दी थी।
विरोध दरकिनार कर जबरन बनाया बांध
एनीकट के ढहने की जड़ में स्थल चयन का पुराना विवाद भी है। विभागीय दस्तावेजों के अनुसार, इस परियोजना की मूल प्रशासनिक स्वीकृति ‘ग्राम रजौटी (चट्टानपारा) मांड नदी’ के नाम से जारी हुई थी। हालांकि, विभागीय अधिकारियों ने नियमों को ताक पर रखकर इसका निर्माण स्थल बदलते हुए इसे ग्राम भिठुवा में स्थानांतरित कर दिया।
उस समय भी किसानों ने कड़ा विरोध जताते हुए आगाह किया था कि नए स्थल पर एनीकट बनने से नदी का बहाव खेतों की तरफ मुड़ेगा और कटाव बढ़ेगा। अधिकारियों ने चेतावनियों को अनसुना कर निर्माण पूरा कराया। नतीजा यह हुआ कि बांध बनने के बाद से खेतों में लगातार बाढ़ का पानी घुसकर फसलें बर्बाद करता रहा और अंततः करोड़ों का ढांचा भी तबाह हो गया।
जिम्मेदार अफसरों पर दर्ज हो एफआईआर
आक्रोशित ग्रामीणों का कहना है कि यह प्राकृतिक आपदा नहीं, बल्कि विभागीय कमीशनखोरी और लापरवाही से उपजा मानव-निर्मित नुकसान है। किसानों ने मांग की है कि निर्माण की गुणवत्ता से समझौता करने वाले तत्कालीन अभियंताओं और ठेकेदारों की जवाबदेही तय कर उनके विरुद्ध दंडात्मक कार्रवाई की जाए।
विभाग का पक्ष
“मामले का संज्ञान लिया गया है। आगामी बजट सत्र में एनीकट के पुनर्निर्माण/मरम्मत हेतु विस्तृत प्रस्ताव तैयार कर शासन को भेजा जाएगा। वहां से तकनीकी व वित्तीय स्वीकृति मिलने के बाद आगे का कार्य शुरू कराया जाएगा।”- शुभम गुप्ता, अनुविभागीय अधिकारी (SDO), जल संसाधन विभाग
