– कभी कांग्रेसियों को कहते थे ‘फूल छाप कांग्रेसी’, अब भाजपाइयों पर कसा जा रहा ‘पंजा छाप भाजपाई’ का तंज
जांजगीर-चांपा। जिले की सियासत में इन दिनों एक अजीब राजनीतिक तस्वीर देखने को मिल रही है। जब कांग्रेस विधायक व्यास कश्यप से जुड़े किसी मामले पर भाजपा को राजनीतिक रूप से घेरने का मौका मिलता है, तब सत्ता पक्ष के छोटे से लेकर बड़े नेताओं तक की जुबान अचानक खामोश क्यों हो जाती है? मीडिया को जब विधायक के खिलाफ भाजपा की प्रतिक्रिया या बाइट की जरूरत पड़ती है, तब कई नेता फोन उठाने से ही परहेज करते नजर आते हैं। कुछ बयान देने से बचते हैं तो कुछ ‘बाद में बात करते हैं’ कहकर मामला टाल देते हैं।
सवाल यह है कि विरोधी दल के विधायक के खिलाफ मुखर होने में आखिर भाजपा नेताओं को झिझक किस बात की है?
राजनीतिक गलियारों में इसे लेकर तरह-तरह की चर्चाएं हैं। विपक्ष पर हमलावर रहने वाली भाजपा जब अपने सामने कांग्रेस विधायक का मुद्दा आता है तो कई नेताओं की आक्रामकता अचानक ‘साइलेंट मोड’ में चली जाती है। यही वजह है कि अब सियासी गलियारों में तंज भी सुनाई देने लगा है- “कहीं जिले में फूल छाप भाजपाइयों के बीच पंजा छाप भाजपाइयों की संख्या तो नहीं बढ़ रही?”
गौरतलब है कि सत्ता की राजनीति में बयानबाजी कोई नई बात नहीं है। भाजपा नेता अक्सर कांग्रेस पर हमला बोलते रहे हैं और कांग्रेस भी भाजपा को घेरती रही है। लेकिन सवाल तब बड़ा हो जाता है, जब किसी मुद्दे पर पार्टी की आधिकारिक लाइन के बजाय व्यक्तिगत रिश्ते और राजनीतिक समीकरण हावी नजर आने लगें।
कभी भाजपा नेताओं द्वारा कांग्रेस के उन नेताओं पर ‘फूल छाप कांग्रेसी’ का तंज कसा जाता था, जिन पर भाजपा के प्रति नरम रुख रखने के आरोप लगाए जाते थे। अब वही राजनीतिक जुमला पलटकर भाजपा के खेमे में सुनाई देने लगा है- ‘पंजा छाप भाजपाई’!
हालांकि यह केवल राजनीतिक कटाक्ष है या वास्तव में भाजपा नेताओं और कांग्रेस विधायक के बीच बेहतर व्यक्तिगत संबंध हैं, यह तो संबंधित नेता ही स्पष्ट कर सकते हैं। लेकिन इतना जरूर है कि मीडिया के कैमरे और माइक सामने आते ही बयान देने की राजनीति में अचानक ब्रेक लग जाना भाजपा की स्थानीय सियासत पर सवाल जरूर खड़े कर रहा है।
अब देखना दिलचस्प होगा कि भाजपा के नेता इस ‘खामोशी’ को कब तोड़ते हैं और विधायक व्यास कश्यप के खिलाफ राजनीतिक मोर्चे पर खुलकर मैदान में उतरते हैं या फिर ‘रिश्ते निभेंगे, बयान नहीं देंगे’ की राजनीति ही आगे भी जारी रहती है।
