जांजगीर-चांपा। युवा कांग्रेस के संगठन चुनाव के साथ ही कांग्रेस की अंदरूनी राजनीति एक बार फिर गरमाने लगी है। प्रदेश से लेकर जिला और विधानसभा स्तर तक संगठन के विभिन्न पदों के लिए चुनावी सरगर्मियां तेज हो गई हैं। प्रत्याशी अपनी राजनीतिक जमीन मजबूत करने के लिए युवाओं के घर-घर दस्तक दे रहे हैं। चुनावी मैदान में उतरने वाले कई युवा प्रत्याशियों ने प्रचार-प्रसार में जमकर ताकत झोंक दी है। चर्चा तो यहां तक है कि कुछ प्रत्याशी अपनी दावेदारी मजबूत करने के लिए लाखों रुपये तक खर्च करने से पीछे नहीं हट रहे हैं।
युवा कांग्रेस के संगठन चुनाव में 35 वर्ष से कम आयु के पात्र युवाओं को मतदान का अवसर दिया गया है। पूरी चुनाव प्रक्रिया मोबाइल एप के माध्यम से ऑनलाइन संचालित हो रही है। पात्र मतदाता अपने EPIC नंबर के आधार पर पसंदीदा प्रत्याशी के पक्ष में वोट कर रहे हैं। यह प्रक्रिया करीब एक महीने तक चलने वाली है, लिहाजा प्रत्याशियों के पास अपनी पकड़ और जनाधार साबित करने के लिए पर्याप्त समय है।लेकिन संगठन चुनाव ने कांग्रेस के भीतर चल रही आपसी खींचतान और गुटबाजी को भी सतह पर ला दिया है। अलग-अलग खेमों से जुड़े युवा अपने-अपने प्रत्याशियों को मजबूत करने में जुटे हैं। वरिष्ठ नेताओं के समर्थक भी पर्दे के पीछे से अपने पसंदीदा प्रत्याशियों के पक्ष में माहौल बनाने में सक्रिय बताए जा रहे हैं।
लेकिन संगठन चुनाव ने कांग्रेस के भीतर चल रही आपसी खींचतान और गुटबाजी को भी सतह पर ला दिया है। अलग-अलग खेमों से जुड़े युवा अपने-अपने प्रत्याशियों को मजबूत करने में जुटे हैं। वरिष्ठ नेताओं के समर्थक भी पर्दे के पीछे से अपने पसंदीदा प्रत्याशियों के पक्ष में माहौल बनाने में सक्रिय बताए जा रहे हैं।सवाल यह है कि क्या यह चुनाव वास्तव में युवा कांग्रेस को मजबूत करने की कवायद है या फिर कांग्रेस के भीतर अपनी-अपनी राजनीतिक जमीन और भविष्य की दावेदारी मजबूत करने का मंच? प्रत्याशियों की बढ़ती सक्रियता और चुनावी खर्च को देखकर सियासी गलियारों में चर्चाओं का दौर शुरू हो गया है।
सवाल यह है कि क्या यह चुनाव वास्तव में युवा कांग्रेस को मजबूत करने की कवायद है या फिर कांग्रेस के भीतर अपनी-अपनी राजनीतिक जमीन और भविष्य की दावेदारी मजबूत करने का मंच? प्रत्याशियों की बढ़ती सक्रियता और चुनावी खर्च को देखकर सियासी गलियारों में चर्चाओं का दौर शुरू हो गया है।
युवा कांग्रेस का यह चुनाव आने वाले समय में कांग्रेस की नई पीढ़ी का नेतृत्व कौन करेगा, इसका संकेत भी माना जा रहा है। यही वजह है कि चुनाव अब केवल संगठन का चुनाव नहीं रह गया, बल्कि कई युवाओं के लिए भविष्य की बड़ी राजनीतिक पारी की पहली सीढ़ी बनता दिखाई दे रहा है।
