नई दिल्ली। केंद्र सरकार ने दिल्ली के जंतर-मंतर पर शांतिपूर्ण प्रदर्शन करने वाले छात्रों और बीते 20 जुलाई को संसद मार्च में हिस्सा लेने वाले युवाओं के प्रति अपने रुख में बड़ी नरमी के संकेत दिए हैं। उच्च पदस्थ सूत्रों के अनुसार, सरकार इन प्रदर्शनकारियों के खिलाफ कोई भी आपराधिक मामला (केस) दर्ज न करने पर गंभीरता से विचार कर रही है। इसके साथ ही, संसद में पहले से दिए गए आश्वासन के तहत सरकार परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता लाने और व्यापक शैक्षिक सुधारों पर विस्तृत चर्चा के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है।
छात्रों के हितों को प्राथमिकता देते हुए सरकार हाल ही में NEET पेपर लीक जैसी दुखद घटनाओं के कारण आत्महत्या करने वाले अभ्यर्थियों के पीड़ित परिवारों को उचित मुआवजा देने की योजना पर भी सकारात्मक रुख अपना रही है। इस संवेदनशील मुद्दे पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने स्वयं देर रात देश के करोड़ों छात्रों और अभिभावकों के साथ एक विशेष वीडियो संदेश के माध्यम से सीधा संवाद साधा। उन्होंने छात्रों को आश्वस्त करते हुए कहा कि देश के युवाओं के भविष्य के साथ किसी भी सूरत में खिलवाड़ नहीं होने दिया जाएगा।
प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन में स्पष्ट किया कि पेपर लीक की गंभीर समस्या का स्थायी समाधान निकालने के लिए सरकार एक नया और बेहद कठोर कानून लाने जा रही है। इस विशेष कानून का मसौदा (ड्राफ्ट) केंद्रीय कैबिनेट की बैठक में मंजूरी के लिए रखा जाएगा, जिसके बाद इसे आगामी सप्ताह ही संसद से पास कराने की पूरी कोशिश की जाएगी। इस कदम से साफ है कि भविष्य में परीक्षाओं में धांधली और गड़बड़ी करने वालों के खिलाफ सरकार का रुख बेहद सख्त रहने वाला है।
सरकार के इन सकारात्मक आश्वासनों और राहत भरे कदमों के बीच एक और बड़ा घटनाक्रम हुआ, जब गुरुग्राम के मेदांता अस्पताल में भर्ती प्रसिद्ध पर्यावरणविद और सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक ने अपनी भूख हड़ताल समाप्त कर दी। गत 28 जून से अनशन पर बैठे वांगचुक ने केंद्रीय मंत्री जे.पी. नड्डा और जितेंद्र सिंह की मौजूदगी में अपना अनशन तोड़ा। केंद्र सरकार ने उन्हें भी आश्वस्त किया है कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन करने वाले छात्रों पर कोई दंडात्मक कार्रवाई नहीं होगी और उनकी तमाम मांगों पर भी सरकार पूरी गंभीरता से विचार करेगी।
