रायगढ़। भारी बारिश के बीच जहां लोग घरों से निकलने से कतराते हैं, वहीं छत्तीसगढ़ के रायगढ़ जिले में नन्हे-मुन्ने बच्चे जान जोखिम में डालकर शिक्षा का दीप जलाने को मजबूर हैं। जिले के धरमजयगढ़ ब्लॉक से आई तस्वीरें प्रशासनिक दावों और खोखले आश्वासनों की पोल खोलने के लिए काफी हैं।
यहां क्रोंधा से खड़गांव स्थित सरकारी स्कूल जाने के लिए हर दिन 51 मासूम बच्चों को उफनते नाले को पार करना पड़ रहा है। रास्ते की दुश्वारियों का आलम यह है कि बच्चे अपने बस्ते के साथ दो जोड़ी कपड़े लेकर स्कूल निकलते हैं, एक जोड़ी पानी में नाला पार करते वक्त भीग जाती है और दूसरी जोड़ी स्कूल पहुंचकर सूखा बदन ढंकने के काम आती है।
रायगढ़ में पिछले तीन दिनों से लगातार हो रही मूसलाधार बारिश ने इस रास्ते को और भी खतरनाक बना दिया है। नाले में पानी का बहाव बेहद तेज है, लेकिन स्कूल पहुंचने की जिजीविषा में बच्चे एक-दूसरे का हाथ थामकर इस खौफनाक जलभराव को पार करते हैं। इतना ही नहीं, नाला पार करने के बाद भी राहत नहीं मिलती; आगे 5 किलोमीटर का रास्ता पूरी तरह कीचड़ में तब्दील हो चुका है, जहां से पैदल निकलना भी किसी परीक्षा से कम नहीं है।
ग्रामीण लंबे समय से इस नाले पर एक अदद पुल की मांग कर रहे हैं। चुनाव आते ही नेता आश्वासन देते हैं, घोषणाएं भी होती हैं, लेकिन बारिश बीतते ही वादे ठंडे बस्ते में चले जाते हैं। आज तक पुल न बनने का खामियाजा इन 51 मासूमों को अपनी जान दांव पर लगाकर चुकाना पड़ रहा है।
