अम्बिकापुर..(सीतापुर/अनिल उपाध्याय)..किसानों को सिंचाई की सुविधा उपलब्ध कराने जल संसाधन विभाग द्वारा बनवाया गया एनीकट को बारिश ने अपनी चपेट में ले लिया।बारिश की वजह से नदी में आने वाली बाढ़ की चपेट में आते ही करोड़ो रूपये की लागत से बना एनीकट भर भराकर टूट गया।सिंचाई सुविधा उपलब्ध कराने के लिहाज से बनाये गए एनीकेट की दुर्दशा देख किसानों में काफी आक्रोश है।उन्होंने एनीकट की इस दुर्दशा के लिए विभागीय अधिकारियों को दोषी ठहराते हुए जांच एवं कार्यवाही की मांग की है।
विदित हो कि ग्राम पंचायत भिठुवा से होकर बहने वाली मांड नदी पर जल संसाधन विभाग द्वारा वर्षो पहले लगभग चार करोड़ की लागत से एनीकट का निर्माण कराया गया था।करोड़ो रूपये की लागत से बने इस एनीकट का उद्देश्य किसानों को साल भर सिंचाई सुविधा उपलब्ध कराना था।ताकि किसान इस एनीकट की बदौलत अपने खेतों की सिंचाई कर साल भर फसल उपजा सके और उसे बाजार में बेचकर आर्थिक रूप से मजबूत हो सके।लेकिन निर्माण के दौरान बरती गई लापरवाही के कारण एनीकट लंबे समय तक नही टिक सका और क्षतिग्रस्त हो गया।मांड़ नदी में आई बाढ़ ने इसे अपनी चपेट में ले लिया और एनीकट का दो तीन पिल्लर छोड़कर बाकी सारा पिल्लर टूटकर तिनके की तरह बिखर गया।जिस उद्देश्य के साथ इस एनीकट का निर्माण किया गया था उस पर विभागीय अधिकारियों की लापरवाही की वजह से पानी फिर गया।
इस संबंध में किसान जगमोहन मंदीप विजय समेत अन्य ग्रामीणों ने बताया कि पूर्व में भी एनीकट बाढ़ की वजह से क्षतिग्रस्त हो गया था।जिसका विभागीय अधिकारियों द्वारा मरम्मत करा दिया गया था।उन्होंने बताया कि निर्माण के दौरान नींव की गहराई कम कर दी गई थी जिसकी वजह से एनीकट की जमीनी पकड़ कमजोर थी और वो नदी में आई बाढ़ का दबाव नही झेल सकी और टूट गई।उन्होंने एनीकट की इस दुर्दशा के लिए विभागीय अधिकारियों की लापरवाही एवं निर्माण के दौरान बरती गई अनियमितता को देते हुए कहा कि इस बांध से किसानों को लाभ कम नुकसान ज्यादा हुआ है।इस बांध का निर्माण गलत जगह पर किया गया था जिसकी वजह से एक छोर पर नदी का कटाव बढ़ने लगा था और खेतों को नुकसान हो रहा था।एनीकट का पानी खेतों में घुस जाता था और फसल बर्बाद कर देता था।उन्होंने एनीकट निर्माण में हुई अनियमितता की जांच एवं इसके लिए जिम्मेदार अधिकारियों के विरुद्ध कार्यवाही की मांग की है।
एनीकट बनना था चट्टानपारा में बना दिया भिठुवा में:-
मांड़ नदी पर बने इस एनीकट की स्वीकृति ग्राम रजौटी चट्टानपारा मांड़ नदी के नाम से स्वीकृत हुई थी।लेकिन उस दौरान जलसंसाधन विभाग के अधिकारियों ने स्थल परिवर्तित करते हुए इस एनीकट का निर्माण ग्राम भिठुवा मांड़ नदी पर करवा दिया था।एनीकट निर्माण के दौरान किसान एवं ग्रामीणों ने चयनित स्थल का ये कहते हुए विरोध किया था कि इससे नदी का कटाव बढ़ेगा और खेतों को नुकसान पहुँचेगा।लेकिन अधिकारियों ने उनकी एक नही सुनी और किसानों के विरोध के बाद भी चयनित स्थल पर एनीकट का निर्माण करा दिया।अधिकारियों का यह निर्णय आगे चलकर गलत साबित हुआ और इसका नुकसान किसानों को झेलना पड़ा।इसके साथ करोड़ो रूपये की लागत से बना एनीकट भी बाढ़ की चपेट में आकर पूरी तरह तबाह हो गया।
इस संबंध में एसडीओ जल संसाधन विभाग शुभम गुप्ता ने बताया कि इसके लिए बजट सत्र में प्रस्ताव बनाकर भेजा जायेगा।वहाँ स्वीकृति मिलने के बाद इसका मरम्मत कार्य कराया जायेगा।
