भोपाल। मध्य प्रदेश के कटनी जिले में विजयराघवगढ़ से विधायक संजय सत्येंद्र पाठक की पारिवारिक कंपनी ‘यश लॉजिस्टिक्स प्राइवेट लिमिटेड’ और पांच भू-स्वामियों पर सरकार को करोड़ों रुपये के राजस्व का चूना लगाने का गंभीर आरोप लगा है। कलेक्टर ऑफ स्टाम्प ने इस मामले में कड़ा रुख अपनाते हुए कंपनी और भू-स्वामियों से स्टाम्प ड्यूटी और पंजीयन शुल्क की भारी-भरकम राशि वसूलने के आदेश जारी कर दिए हैं। कलेक्टर कोर्ट के इस फैसले के बाद अब दोषी पक्षों को बकाया राशि के साथ-साथ पेनल्टी और एक प्रतिशत मासिक ब्याज भी चुकाना होगा। कलेक्टर ऑफ स्टाम्प के पीठासीन अधिकारी पंकज कोरी ने यह आदेश तो गत 29 जून 2026 को ही पारित कर दिया था, लेकिन बुधवार को इसे सार्वजनिक किया गया, जिसके बाद से राजनीतिक और व्यावसायिक हलकों में हड़कंप मच गया है।
अदालती जांच और गोपनीय निरीक्षण में यह चौंकाने वाला खुलासा हुआ है कि जमीनों की रजिस्ट्री के दौरान उनकी वास्तविक भौगोलिक स्थिति को जानबूझकर छिपाया गया था। नेशनल हाईवे-7 (मिर्ज़ापुर रोड) और अन्य मुख्य मार्गों से लगी बेहद कीमती और करोड़ों रुपये मूल्य की इन जमीनों को दस्तावेजों में ‘अंदरूनी क्षेत्र’ का दर्शाया गया था, ताकि कम टैक्स देना पड़े। इस सोची-समझी हेराफेरी के जरिए सरकारी खजाने को सीधे तौर पर बड़ा नुकसान पहुंचाया गया। इस पूरे मामले का पर्दाफाश हाउसिंग बोर्ड कॉलोनी निवासी नाजिम खान की शिकायत के बाद हुआ। उन्होंने आरोप लगाया था कि क्रेता कंपनी के हर्ष कपूर ने भू-स्वामियों के साथ साठगांठ करके वर्ष 2018 और 2019 में की गई रजिस्ट्रियों के दस्तावेजों में यह जालसाजी की थी। दिलचस्प बात यह है कि सुनवाई के दौरान जब न्यायालय ने हर्ष कपूर को नोटिस भेजे, तो उन्होंने इन्हें स्वीकार करने से ही इनकार कर दिया, जिसके बाद अदालत को इस मामले में एकपक्षीय कार्रवाई का फैसला लेना पड़ा। बाद में संयुक्त उप पंजीयक द्वारा किए गए गोपनीय निरीक्षण में भी शिकायतकर्ता के सभी आरोप पूरी तरह सच पाए गए।
न्यायालय ने इस मामले में झिंझरी स्थित खसरा नंबर 292 से जुड़े पांच अलग-अलग मामलों की गहन सुनवाई की, जिनमें से चार रजिस्ट्रियों में बड़े स्तर पर गड़बड़ी पकड़ी गई। सुनील कुमार सहजवानी और जसवंत कुमार मोहनानी की जमीनों का सौदा करते समय उनकी नेशनल हाईवे से सटी स्थिति को पूरी तरह छुपा लिया गया था। वहीं, नानकराम भोजवानी के मामले में तो मुख्य मार्ग की जानकारी छिपाने के साथ-साथ मौके पर बने 3500 वर्ग फीट के एक विशाल शेड (कन्स्ट्रक्शन) का भी जिक्र दस्तावेजों में नहीं किया गया था। इसी तरह, अनिल टहलरमानी की बेशकीमती जमीन को भी कागजों में अंदर की तरफ दिखाकर टैक्स की बड़ी चोरी की गई थी। अब अदालत के सख्त आदेश के बाद, वर्ष 2018 से लेकर अब तक की पूरी बकाया राशि पर एक प्रतिशत प्रति माह की दर से जुर्माना और एक प्रतिशत मासिक ब्याज वसूला जाएगा। जानकारों और विभागीय सूत्रों के मुताबिक, यदि इस पूरी देय राशि का भुगतान जुलाई 2026 में किया जाता है, तो पेनल्टी और ब्याज मिलाकर यह आंकड़ा करीब 2 करोड़ 20 लाख रुपये तक पहुंच सकता है।
