दुर्ग। जिले के अंडा थाना क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले चिंगारी गांव में रविवार को एक दिल दहला देने वाला हादसा सामने आया, जहां खेत में काम कर रहे एक किसान की करंट लगने से दर्दनाक मौत हो गई। इस घटना ने न सिर्फ एक परिवार को उजाड़ दिया, बल्कि बिजली विभाग की कार्यप्रणाली पर भी गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। विभाग की इस कथित लापरवाही से आक्रोशित ग्रामीणों ने मुआवजे की मांग को लेकर मृतक किसान के शव के साथ बिजली कार्यालय के सामने जोरदार प्रदर्शन और घेराव किया।
हादसे का शिकार हुए किसान की पहचान वीरेंद्र देशमुख के रूप में हुई है, जो अपने खेत में घास कटाई का काम कर रहे थे। दरअसल, उनके खेत के बीच से ही बिजली की मुख्य लाइन गुजर रही है। पिछले काफी समय से बिजली का खंभा एक तरफ झुक गया था, जिसके कारण हाई-टेंशन तार खेत के बिल्कुल करीब आ गए थे। इस वजह से खेत में ट्रैक्टर चलाने और खेती के अन्य काम करने में लगातार परेशानी हो रही थी।
बार-बार बाधित हो रहे काम से परेशान होकर वीरेंद्र ने दो दिन पहले खुद ही आगे बढ़कर झूलते हुए तारों को खेत के किनारे लगे सीमेंट के पोल से बांध दिया था, ताकि जुताई का काम सुरक्षित रूप से किया जा सके। लेकिन उन्हें क्या पता था कि यही कोशिश उनकी जान की दुश्मन बन जाएगी। सीमेंट के उस पोल पर लोहे की कंटीली फेंसिंग (तारों का घेरा) भी लगी हुई थी। पोल से बंधे बिजली के तार के कारण पूरी फेंसिंग में करंट फैल गया और रविवार को काम के दौरान जैसे ही वीरेंद्र का हाथ फेंसिंग से छुआ, वे उसकी चपेट में आ गए और मौके पर ही उन्होंने दम तोड़ दिया।
इस घटना के बाद ग्रामीणों का गुस्सा फूट पड़ा। ग्रामीणों का आरोप है कि यह कोई अचानक हुआ हादसा नहीं है, बल्कि विभाग की घोर लापरवाही का नतीजा है। कई महीनों पहले ही ग्रामीणों ने बिजली विभाग को लिखित आवेदन देकर इन खतरनाक झूलते तारों को हटाने की गुहार लगाई थी। इसके बावजूद जिम्मेदार अधिकारियों के कान पर जूं तक नहीं रेंगी। न तो तारों को ठीक किया गया और न ही विभाग का कोई कर्मचारी कभी मौके का निरीक्षण करने पहुंचा। ग्रामीणों ने साफ कर दिया है कि जब तक पीड़ित परिवार को उचित मुआवजा और दोषियों पर कार्रवाई नहीं होती, उनका आक्रोश शांत नहीं होगा।
