अम्बिकापुर। दुर्लभ रेडियोएक्टिव पदार्थों की पैकिंग और उन्हें ऊंचे दामों पर बेचने का झांसा देकर सवा तीन करोड़ रुपये की ठगी करने वाले एक अंतरराज्यीय गिरोह का सरगुजा पुलिस ने भंडाफोड़ किया है। सरगुजा के आईजी और एसएसपी राजेश अग्रवाल के कड़े दिशा-निर्देशों के बाद गांधीनगर थाना पुलिस और साइबर सेल ने संयुक्त रूप से बड़ी कार्रवाई करते हुए इस हाईप्रोफाइल धोखाधड़ी मामले में तीन शातिर आरोपियों को गिरफ्तार करने में सफलता हासिल की है। पुलिस ने आरोपियों के पास से ठगी में इस्तेमाल किए गए कई एटीएम कार्ड, चेकबुक और मोबाइल फोन भी जब्त किए हैं।
इस सनसनीखेज मामले का खुलासा तब हुआ जब गांधीनगर थाना क्षेत्र के गंगापुरखुर्द निवासी 41 वर्षीय करमबेल कच्छप ने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई। पीड़ित ने बताया कि साल 2023 से 2024 के बीच आरोपियों ने एक बेहद सोची-समझी साजिश के तहत उन्हें अपने जाल में फंसाया था। आरोपियों ने पीड़ित को फर्जी लैब रिपोर्ट और नकली रजिस्ट्रेशन दस्तावेज दिखाकर यह भरोसा दिलाया कि उनके पास बेहद कीमती और दुर्लभ रेडियोएक्टिव सामान है। इस काल्पनिक सामान की पैकिंग और देश-विदेश में बिक्री का लालच देकर आरोपियों ने किश्तों में पीड़ित से कुल 3 करोड़ 8 लाख 78 हजार रुपये ऐंठ लिए। ठगी का अहसास होने पर प्रार्थी ने थाने में गुहार लगाई, जिसके बाद पुलिस ने नए कानून बीएनएस (भारतीय न्याय संहिता) की विभिन्न संगीन धाराओं के तहत मामला दर्ज कर जांच शुरू की।
करोड़ों रुपये की इस ठगी की गंभीरता को देखते हुए वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों के मार्गदर्शन में साइबर सेल की मदद ली गई। तकनीकी इनपुट और लोकेशन ट्रैकिंग के आधार पर सरगुजा पुलिस की दो विशेष टीमों को तत्काल उत्तर प्रदेश के बनारस और पश्चिम बंगाल रवाना किया गया। इसी दौरान पुलिस को सूचना मिली कि गिरोह के मुख्य सरगना बिहार भागने की फिराक में हैं। छत्तीसगढ़ पुलिस ने तुरंत रेलवे सुरक्षा बल (आरपीएफ) बिलासपुर की टीम के साथ संपर्क साधा और संयुक्त रूप से पटना रेलवे स्टेशन की घेराबंदी कर दी। इस रणनीतिक ऑपरेशन में पुलिस ने तेलंगाना निवासी 51 वर्षीय डॉक्टर बल्ला रामा कृष्णा और वाराणसी के रहने वाले 38 वर्षीय संजय कुमार बिंद को स्टेशन पर ही दबोच लिया। वहीं, गिरोह के तीसरे सदस्य बाबू लाल राजभर को उत्तर प्रदेश के बनारस (पिंडरा) से गिरफ्तार किया गया। पूछताछ में आरोपियों ने अपना जुर्म कबूल कर लिया है और पुलिस को उनके खातों से करोड़ों की हेराफेरी के पुख्ता सबूत मिले हैं।
इस बड़े अंतरराज्यीय रैकेट का पर्दाफाश करने में गांधीनगर थाना प्रभारी प्रवीण कुमार द्विवेदी, आरक्षक अरविंद उपाध्याय, अमृत सिंह, रिषभ सिंह, अतुल सिंह, विकास सिंह सहित साइबर सेल के एएसआई अजीत मिश्रा और आरक्षक रमेश राजवाड़े की मुख्य भूमिका रही। साथ ही, आरपीएफ बिलासपुर के सब-इंस्पेक्टर डी.के. सिंह, हेड कांस्टेबल रजनीश द्विवेदी और कांस्टेबल वैद्यनाथ ने इस संयुक्त ऑपरेशन को सफल बनाने में सराहनीय योगदान दिया। सभी आरोपियों को कोर्ट में पेश कर न्यायिक रिमांड पर जेल भेज दिया गया है।
