धमतरी। जिले के शहरी और ग्रामीण इलाकों में पिछले कुछ दिनों से पेट्रोल-डीजल की किल्लत ने आम जनजीवन की रफ्तार पर ब्रेक लगा दिया है। शहर के गिने-चुने केंद्रों जैसे आंबेडकर चौक और रुद्री रोड को छोड़ दें, तो अधिकांश पेट्रोल पंपों पर ईंधन खत्म हो चुका है। सुबह होते ही पंपों पर छोटे-बड़े वाहनों की लंबी कतारें नजर आने लगती हैं, जहाँ अपनी बारी के इंतजार में लोग घंटों खड़े रहने को मजबूर हैं। संकट का असर इस कदर गहरा गया है कि ग्रामीण क्षेत्रों से लोग गाड़ियों के अलावा जरकिन और डिब्बे लेकर भी पेट्रोल-डीजल की तलाश में भटक रहे हैं।
पिछले एक महीने से आपूर्ति बाधित होने के कारण जिले के कुरुद और भखारा जैसे प्रमुख क्षेत्रों में भी स्थिति चिंताजनक बनी हुई है। दर्जनों से अधिक पंपों में स्टॉक पूरी तरह नील हो चुका है। शहर के रत्नाबांध चौक सहित कई प्रमुख केंद्रों पर तो बकायदा ‘पेट्रोल-डीजल नहीं है’ की तख्ती टांग दी गई है, जिसने वाहन चालकों की चिंता और बढ़ा दी है। दोपहर ढलते ही जिन पंपों पर ईंधन उपलब्ध है, वहां मोटरसाइकिल, कार, ट्रैक्टर और ट्रकों की भारी भीड़ उमड़ रही है, जो देर रात तक जारी रहती है। इस अप्रत्याशित संकट को लेकर वाहन मालिकों और चालकों के बीच तरह-तरह की आशंकाएं और चर्चाएं गर्म हैं।
इस बीच, गहराते संकट को देखते हुए जिला प्रशासन ने स्थिति को पूरी तरह नियंत्रण में होने का दावा किया है। मामले पर स्पष्टीकरण देते हुए कलेक्टर अविनाश मिश्रा ने कहा कि जिले के पेट्रोल पंपों के लिए ऑयल कंपनियों के डिपो से लगातार आपूर्ति की जा रही है और जल्द ही स्थिति सामान्य हो जाएगी। उन्होंने आम जनता से किसी भी तरह की अफवाहों पर ध्यान न देने और पैनिक बाइंग (अनावश्यक रूप से ईंधन का संग्रहण) न करने की पुरजोर अपील की है ताकि व्यवस्था को सुचारू रूप से चलाया जा सके।
