बालोद। छत्तीसगढ़ के बालोद जिले के अरकार गांव से सरकारी दावों और जमीनी हकीकत को आईना दिखाती एक बेहद चिंताजनक तस्वीर सामने आई है। यहाँ शासन के निर्देशों पर आम जनता की दिक्कतों को दूर करने के लिए ‘सुशासन तिहार’ के तहत जनसमस्या निवारण शिविर का भव्य आयोजन किया गया था। इस शिविर में एक तरफ कलेक्टर सहित जिले के तमाम बड़े प्रशासनिक अधिकारी मंच पर बैठकर बड़े ही इत्मीनान से लोगों की शिकायतें सुन रहे थे और मौके पर ही उनका निराकरण कर रहे थे।
तो वहीं दूसरी तरफ इसी पंडाल के ठीक पीछे का नजारा कुछ और ही कहानी बयां कर रहा था। सुशासन के इस मंच पर कानून की धज्जियां उड़ाते हुए मासूम नाबालिग बच्चों से भारी-भरकम काम कराया जा रहा था। कार्यक्रम के दौरान कई मासूम बच्चे पानी से भरे भारी-भारी केन को एक जगह से दूसरी जगह ढोते और मजदूरी करते हुए साफ देखे गए।
इस पूरे घटनाक्रम ने प्रशासनिक मुस्तैदी और संवेदनशीलता पर एक बड़ा प्रश्नचिह्न खड़ा कर दिया है, क्योंकि बाल श्रम को रोकने की जिम्मेदारी जिस प्रशासनिक अमले पर है, उसी की मौजूदगी में सरेआम नौनिहालों का शोषण होता रहा। सबसे हैरान करने वाली बात यह रही कि अधिकारियों की नाक के नीचे चल रहे इस गैर-कानूनी काम को लेकर पूरा प्रशासन पूरी तरह अनभिज्ञ और बेखबर बना रहा।
जनता की समस्याओं का निपटारा करने का दम भरने वाले जिम्मेदार अधिकारी जब अपने ही कार्यक्रम की मर्यादा और मासूमों के अधिकारों की रक्षा नहीं कर सके, तो वे आम जनता को किस प्रकार का सुशासन दे रहे हैं, यह अपने आप में एक बड़ा सवाल है। फिलहाल, अधिकारियों की इस घोर लापरवाही और मासूमों से बाल श्रम कराए जाने का यह मामला अब पूरे क्षेत्र में भारी चर्चा और आक्रोश का विषय बना हुआ है।
