दंतेवाड़ा। जिले के बैलाडीला क्षेत्र में स्थित आलनार पहाड़ी को बचाने के लिए स्थानीय ग्रामीणों और आदिवासी नेताओं ने अब आर-पार की लड़ाई का मन बना लिया है। आरती स्पंज कंपनी को मिली खनन लीज के विरोध में गंजेनार में आयोजित एक अहम बैठक के दौरान पहाड़ को बचाने के लिए रणनीति तैयार की गई। बस्तरिया राज मोर्चा के संयोजक मनीष कुंजाम की अध्यक्षता में हुई इस बैठक में आंदोलन को गति देने के लिए ‘पहाड़ बचाओ समिति’ (या कार्यकारिणी) का गठन किया गया, जिसकी कमान विमला सोरी को सौंपी गई है। इसके साथ ही 11 सदस्यीय कार्यकारिणी भी बनाई गई है जो इस पूरे आंदोलन का संचालन करेगी।
इस खनन लीज को निरस्त कराने के लिए अब एक बड़े आंदोलन की रूपरेखा तैयार की जा चुकी है, जिसके तहत आगामी 7 जून को आलनार गांव से दंतेवाड़ा जिला मुख्यालय तक एक विशाल पदयात्रा निकाली जाएगी। यह पदयात्रा पांच दिनों तक विभिन्न क्षेत्रों से गुजरेगी और किरंदुल, बचेली व भांसी होते हुए 11 जून को दंतेवाड़ा पहुंचेगी। जिला मुख्यालय पहुंचते ही आंदोलनकारी एक बड़ी रैली और प्रदर्शन के जरिए प्रशासन से इस लीज को तुरंत रद्द करने की मांग करेंगे। इस आंदोलन को व्यापक रूप देने के लिए बैलाडीला के पीछे बसे तमाम गांवों के लोगों से भी भारी संख्या में शामिल होने की अपील की गई है।
हालांकि, इस पूरे आंदोलन के बीच स्थानीय स्तर पर दो फाड़ की स्थिति भी नजर आ रही है। आलनार के स्थानीय आदिवासियों का एक गुट इस आंदोलन से खुद को अलग रखे हुए है। जिला पंचायत सदस्य सोमारू और मंगल कुंजाम के नेतृत्व वाले इस गुट का मानना है कि खनन पूरी तरह बंद होने के बजाय शर्तों के साथ होना चाहिए, ताकि खनन से लेकर परिवहन तक के सभी कार्यों में स्थानीय युवाओं और ग्रामीणों को रोजगार मिल सके।
दूसरी तरफ, आंदोलन का नेतृत्व कर रहे मनीष कुंजाम और विमला सोरी का रुख बेहद कड़ा है। उनका साफ कहना है कि खनन की अनुमति मिलने से जल, जंगल और जमीन पूरी तरह तबाह हो जाएंगे। इसके साथ ही ग्रामीणों ने एक गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि ग्राम पंचायत गुमियापाल के आश्रित ग्राम आलनार में साल 2014 के दौरान एक फर्जी ग्रामसभा आयोजित की गई थी और इसी फर्जीवाड़े के दम पर तरल मेट्टा पहाड़ी की लीज कंपनी को सौंपी गई है, जिसका वे अंतिम सांस तक विरोध करेंगे।
