रायपुर। छत्तीसगढ़ में इन दिनों जो कुछ भी चल रहा है, उसने सुशासन के दावों पर एक बड़ा सवालिया निशान लगा दिया है। प्रदेश में रोज-रोज अधिकारी और कर्मचारियों की हड़ताल, प्रदर्शन और तालाबंदी से आखिरकार आम जनता के काम कौन करेगा? राज्य में बेलगाम अफसरशाही और सत्ताधारी दल के नेताओं के बीच टकराव इस कदर हावी हो चुका है कि पूरा सिस्टम पंगु नजर आने लगा है। सरकार को अब जल्द ही कोई बीच का रास्ता निकालना होगा, वरना जनता के बीच यह सीधा और आत्मघाती संदेश जाएगा कि वक्त आने पर मौजूदा प्रशासन पूरी तरह बेबस और लाचार हो जाता है।
इस प्रशासनिक अराजकता की ताजा चिंगारी दुर्ग और सरगुजा से उठी है, जहां अब कनिष्ठ अधिकारी-कर्मचारी संघ ने सीधे तौर पर मोर्चा खोल दिया है। सरगुजा जिले के सीतापुर में भाजपा विधायक रामकुमार टोप्पो और नायब तहसीलदार तुषार मानिक के बीच हुआ विवाद अभी पूरी तरह थमा भी नहीं था कि मामले ने तूल पकड़ लिया। 27 मई को राजापुर में हुई इस कथित मारपीट की घटना के बाद पुलिस ने दोनों पक्षों की तरफ से काउंटर एफआईआर तो दर्ज कर ली, लेकिन कार्रवाई से असंतुष्ट तहसीलदार और नायब तहसीलदार समेत कनिष्ठ अधिकारी संघ अब भाजपा विधायक के खिलाफ सड़कों पर उतर आया है।
अधिकारियों का यह गुस्सा सिर्फ सरगुजा तक सीमित नहीं है, बल्कि दुर्ग जिले में भड़की आग ने इसे और हवा दे दी है। दुर्ग में सुशासन ‘तिहार’ के दौरान जनपद पंचायत के सीईओ रूपेश पांडे और एक भाजपा नेता के बीच तीखी बहस का वीडियो सोशल मीडिया पर जमकर वायरल हुआ था। इस मामले में कलेक्टर की अनुशंसा पर दुर्ग कमिश्नर ने त्वरित एक्शन लेते हुए जनपद सीईओ रूपेश पांडे को निलंबित कर दिया। लेकिन इस निलंबन ने घी में पिंगल का काम किया। निलंबित सीईओ ने सीधे पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल से मुलाकात कर इस कार्रवाई को एकतरफा और गलत ठहरा दिया, जिसके बाद कनिष्ठ अधिकारी-कर्मचारी संघ भड़क उठा है।
अब स्थिति यह है कि इस एकतरफा निलंबन की कार्रवाई के विरोध में कनिष्ठ अधिकारी-कर्मचारी संघ ने सीधे जेल तिराहा के पास महाधरना प्रदर्शन का ऐलान कर दिया है। अधिकारियों और कर्मचारियों के इन बगावती सुरों ने विकास कार्यों की रफ्तार पर ब्रेक लगा दिया है। एक तरफ भाजपा नेताओं से टकराव और दूसरी तरफ अधिकारियों की लामबंदी के बीच सूबे की जनता खुद को ठगा सा महसूस कर रही है। अगर सरकार ने इस बेलगाम होते हालात को वक्त रहते काबू नहीं किया, तो प्रशासनिक व्यवस्था पूरी तरह पटरी से उतर जाएगी।
