नई दिल्ली। आगामी विधानसभा चुनावों में जीत का ताना-बाना बुनने और जमीनी स्तर पर पार्टी को नए सिरे से ऊर्जान्वित करने के लिए कांग्रेस आलाकमान एक बहुत बड़े संगठनात्मक फेरबदल की अंतिम रूपरेखा तैयार कर चुका है। इस बड़े बदलाव की सबसे तेज आंच छत्तीसगढ़ में महसूस की जा रही है, जहां प्रदेश संगठन के मुखिया को बदलकर नए और आक्रामक नेतृत्व को जिम्मेदारी सौंपने की सुगबुगाहट सियासी गलियारों में चरम पर है। पार्टी सूत्रों की मानें तो दिल्ली से लेकर रायपुर तक इस बात पर सहमति बन चुकी है कि चुनावी चुनौतियों का डटकर मुकाबला करने के लिए संगठन के शीर्ष स्तर पर बड़ा नीतिगत और रणनीतिक परिवर्तन बेहद जरूरी हो चुका है।
छत्तीसगढ़ के परिप्रेक्ष्य में यह बदलाव इस मायने में बेहद अहम माना जा रहा है क्योंकि पार्टी यहां नए सामाजिक समीकरणों और युवाओं को आगे लाकर संगठन में एक नया जोश फूंकना चाहती है। हालांकि कांग्रेस के आधिकारिक हलकों से अभी इस फेरबदल को लेकर किसी औपचारिक नाम का ऐलान नहीं किया गया है, लेकिन रायपुर के सियासी हलकों में संभावित नए नामों को लेकर कयासों का बाजार बेहद गर्म है। आलाकमान का स्पष्ट मानना है कि छत्तीसगढ़ जैसे महत्वपूर्ण राज्य में बेहतर समन्वय और प्रभावी रणनीति के बल पर ही भविष्य की चुनावी राह आसान की जा सकती है, जिसके लिए नेतृत्व परिवर्तन को अंतिम रूप दिया जा रहा है।
छत्तीसगढ़ के साथ-साथ इस संगठनात्मक सर्जरी का दायरा उत्तर से लेकर दक्षिण भारत तक फैला हुआ है। दिल्ली और राजस्थान जैसे प्रमुख राज्यों में भी प्रदेश अध्यक्षों को बदलने की कवायद तेज है। राजस्थान में नए सिरे से विपक्ष की भूमिका को धार देने और दिल्ली में खोई हुई जमीन वापस पाने के लिए पार्टी नए कप्तानों की तलाश में है। इसके अलावा पंजाब में भी अंदरूनी संतुलन को साधने के उद्देश्य से प्रदेश संगठन के ऊंचे पदों पर तब्दीली की प्रबल संभावनाएं नजर आ रही हैं, जो सीधे तौर पर आगामी चुनावों में पार्टी के प्रदर्शन को प्रभावित करेगी।
दक्षिण भारत पर विशेष ध्यान केंद्रित करते हुए कांग्रेस इस बार केरल, तमिलनाडु और कर्नाटक में भी नए प्रदेश अध्यक्षों की नियुक्ति करने जा रही है। पार्टी का मानना है कि दक्षिण के इन राज्यों में वर्तमान राजनैतिक परिस्थितियों के अनुकूल नई लीडरशिप को सामने लाना बेहद जरूरी है ताकि वहां संगठन अधिक सक्रिय और चुनावी चुनौतियों के लिए पूरी तरह मुस्तैद रह सके। कर्नाटक में सत्ता में होने के बावजूद संगठन को सरकार के साथ बेहतर तालमेल बिठाने की जिम्मेदारी दी जाएगी, जबकि केरल और तमिलनाडु में गठबंधन के गणित को मजबूत करने वाले चेहरों को तरजीह दी जाएगी।
कांग्रेस केवल प्रदेश अध्यक्षों के स्तर पर ही विराम नहीं ले रही है, बल्कि कई महत्वपूर्ण राज्यों के प्रभारियों के रिपोर्ट कार्ड की समीक्षा के बाद बड़े बदलाव की तैयारी में है। सूत्रों के मुताबिक, महाराष्ट्र, असम और तमिलनाडु में नए प्रभारियों की नियुक्ति जल्द ही की जा सकती है। महाराष्ट्र में आगामी विधानसभा चुनाव को देखते हुए आलाकमान एक ऐसे कद्दावर और कुशल रणनीतिकार को प्रभारी के रूप में तैनात करना चाहता है जो महाविकास अघाड़ी के सहयोगियों के साथ सीटों के तालमेल और अंदरूनी गुटबाजी को प्रभावी ढंग से संभाल सके।
इस पूरी कवायद का सबसे बड़ा संदेश यह है कि कांग्रेस आलाकमान अब पूरी तरह से ‘ग्राउंड लेवल पॉलिटिक्स’ और आक्रामक सांगठनिक कार्यशैली पर निर्भर रहने का मन बना चुका है। पार्टी नेतृत्व का मानना है कि केवल बैठकों और बयानों से चुनाव नहीं जीते जा सकते, बल्कि जमीन पर कार्यकर्ताओं को सक्रिय करने के लिए चेहरों का बदलना और ऊर्जावान नेताओं को आगे लाना अनिवार्य है। सियासी विश्लेषकों की नजरें अब सीधे तौर पर दिल्ली के 10 जनपथ और कांग्रेस मुख्यालय पर टिकी हुई हैं कि कब इस संभावित सूची पर अंतिम मुहर लगती है और छत्तीसगढ़ समेत देश के अन्य राज्यों को नए सेनापति मिलते हैं।
