मनेंद्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर। छत्तीसगढ़ सरकार के ‘राम राज्य’ और सुशासन के बड़े-बड़े दावों की पोल खोलती एक बेहद शर्मनाक और खौफनाक तस्वीर मनेंद्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर (MCB) जिले के जनकपुर-भरतपुर क्षेत्र से सामने आ रही है। जिस पावन धरती को मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्री राम के चरण पड़े थे, आज उसी ऐतिहासिक और धार्मिक धरोहर को नेताओं के संरक्षण में पल रहे रेत माफिया दीमक की तरह चाट रहे हैं। जनकपुर से महज 25 किलोमीटर दूर, हरचौक और हरदी के बीच बहने वाली जीवनदायिनी मवई नदी इन दिनों रेत तस्करों के लिए सोने की खदान बन चुकी है।
कायदे-कानून और खनिज विभाग को ठेंगा दिखाते हुए यहाँ अवैध उत्खनन का ऐसा नंगा नाच चल रहा है, जिसने स्थानीय प्रशासन की साख और नीयत दोनों को कटघरे में खड़ा कर दिया है। विडंबना देखिए कि जिस हरचौक को भगवान राम के वनवास काल के दौरान दंडकारण्य का ‘प्रवेश द्वार’ माना जाता है, जहाँ भौतिक साक्ष्य मौजूद हैं और जिसे खुद सरकार ने ‘राम वन गमन पथ’ योजना में शामिल कर करोड़ों के विकास के दावे किए थे, आज उसी पवित्र स्थान को माफिया ने अपनी जागीर बना लिया है।
शासन-प्रशासन की नाक के नीचे रात के अंधेरे में जब पूरा इलाका सोता है, तब मवई नदी का सीना चीरने के लिए तीन-तीन भारी-भरकम चैन माउंट मशीनें नदी के जलस्तर को रौंदते हुए उतार दी जाती हैं। यह कोई छोटा-मोटा खेल नहीं, बल्कि छत्तीसगढ़ से लेकर मध्य प्रदेश के रीवा और सीधी तक फैला एक सुव्यवस्थित ‘अवैध रेत कॉरिडोर’ है, जहाँ रोजाना करोड़ों रुपये की रॉयल्टी चोरी कर शासन को सीधे लाखों का चूना लगाया जा रहा है। हैरान करने वाली बात यह है कि इस गुंडागर्दी के खिलाफ जब स्थानीय ग्रामीण आवाज उठाने की कोशिश करते हैं, तो उन्हें सीधे मुंह बंद रखने और जान से मारने की धमकियां दी जाती हैं। माफिया के हौसले इस कदर बुलंद हैं कि वे ग्रामीणों की पुकार को सत्ता के रसूख तले दबा देते हैं।

अब सबसे बड़ा और तीखा सवाल एमसीबी के जिला प्रशासन, पुलिस और खनिज अमले पर उठता है कि आखिर वे किसकी शह पर आंखें मूंदे बैठे हैं? क्या एसी कमरों की ठंडी हवा में सो रहे जिम्मेदार अधिकारियों को तीन-तीन विशालकाय मशीनों की गड़गड़ाहट और दिन-रात गुजरते ओवरलोड हाईवा का शोर सुनाई नहीं देता? या फिर सच यह है कि इस ‘अवैध कॉरिडोर’ को प्रशासनिक और राजनैतिक ‘मौन संरक्षण’ हासिल है, जिसके बदले में मलाई ऊपर तक जा रही है। पवित्र मवई नदी और भगवान राम की स्मृतियों से जुड़े इस क्षेत्र की बदहाली पर जनता अब चुप बैठने वाली नहीं है; वह सीधे सरकार से जवाब मांग रही है कि दावों के ढोल पीटने वाले नेता और अफसर इन माफियाओं के सामने नतमस्तक क्यों हैं और इन पर नकेल कब कसी जाएगी?
