बलरामपुर..(कृष्णमोहन कुमार)..सुदूर वनांचल क्षेत्रों में विशेष पिछड़ी जनजाति समुदाय के उत्थान के लिये पीएम जनमन योजना के तहत बनाये जा रहे बहुउद्देशीय केंद्र निर्माण से पहले ही सिस्टम की भेंट चढ़ गया है..अधिकारी कागजों में दावें और फर्जी प्रगति रिपोर्ट तैयार करने से भी परहेज नही कर रहे है.. यहां तक की जिम्मेदार अधिकारी कार्य का सूचना पटल लगाना भी नियम में नहीं होने की बात कह रहे है..
दरअसल, कुसमी ब्लॉक के चुनचुना और पुंदाग में 56 लाख की लागत से बहुद्देशीय केंद्र का निर्माण कराया जा रहा है.. निर्माण एजेंसी प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना को बनाया गया है.. निर्माणाधीन बहुद्देशीय केंद्र की गुणवत्ता इतनी अच्छी है की तत्कालीन कलेक्टर राजेंद्र कटारा ने निरीक्षण के दौरान ठेकेदार को फटकार लगाई थी..और तत्कालीन कलेक्टर के रहते निर्माण कार्य में तेजी भी आयी थी..लेकिन अब स्थिति जस की तस है..पखवाड़े भर से काम बंद है..ग्रामीणों के माने तो उन्हें यह तक नही पता की उनके गांव में कौन सी भवन बन रही है..
आदिवासी विकास विभाग से स्वीकृत इस निर्माण कार्य को लेकर सहायक आयुक्त समीक्षा जायसवाल का अपना अलग ही तर्क है..उनका कहना है कि उनके विभाग में होने वाले निर्माण कार्यों के लिये सूचना पटल लगाने का प्रावधान ही नहीं है..जबकि जानकारों कहना है की किसी भी निर्माण कार्य के पहले सूचना पटल लगाना अनिवार्य है!.
सड़क की जगह बिल्डिंग..
वैसे प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना सड़क बनाने का कार्य ही करती है..लेकिन विश्वस्त सूत्र बताते है की उस विभाग में भवन निर्माण का एक विंग भी है..खैर बात गुणवत्ता की है..तो चुनचुना और पुंदाग में बन रहे भवनों की गुणवत्ता का स्तर इतना उच्च है कि..दीवार तो तेज हवा भी ना झेल सके..ग्रामीणों का आरोप है की निर्माण एजेंसी और ठेकेदार में इतना भाई चारा है की..जब मन किया काम शुरू और जब मन किया काम बंद..ऐसे में यह बहुद्देशीय केंद्र कब बनेगा और इसके उद्देश्यों की पूर्ति कब होगी समझ से परे है!.
बता दें कि, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मंशा के अनुरूप बहुउद्देशीय केंद्र वनांचल क्षेत्रों में निवासरत विशेष पिछड़ी जनजाति समुदाय के उत्थान के लिये बनाये जा रहे है..जहां एक ही छत के नीचे विभिन्न सामाजिक आर्थिक और कल्याणकारी आवश्यकताओं को एक ही जगह पूरा करना है..लेकिन प्रदेश के आदिमजाति कल्याण विभाग के गृह जिले में उनके ही विभाग के अधिकारी इतने बेलगाम हो चले है की उन्हें धरातल में विकास का पैमाना ही नही पता है!.
निर्माण एजेंसी की लापरवाही और ठेकदार से साठगांठ की वजह से प्रधानमंत्री मोदी के सपनों पर पलीता लगना आम बात है..ढर्रे में चल रहे सिस्टम से इससे ज्यादा की उम्मीद भी नहीं की जा सकती है..की बहुद्देशीय केंद्र जल्द अस्तित्व में आये और कुछ वर्षों तक उसकी मरम्मत की जरूरत भी ना हो..
बहरहाल, स्थानीय प्रशासन और आदिम जाति विकास मंत्री को इस पर ध्यान देना चाहिए..ताकि प्रधानमंत्री मोदी का सपना धरातल पर नजर आ सके..और बहुउद्देशीय की उद्देश्यों की पूर्ति हो!.
