नई दिल्ली। देश की सबसे बड़ी मेडिकल प्रवेश परीक्षा ‘नीट यूजी 2026’ पर पेपर लीक का ग्रहण लग गया है। 3 मई को आयोजित हुई इस परीक्षा को केंद्र सरकार की मंजूरी के बाद नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) ने आधिकारिक तौर पर रद्द करने का ऐतिहासिक फैसला लिया है। इस निर्णय के साथ ही परीक्षा में शामिल हुए करीब 22 लाख अभ्यर्थियों का भविष्य अब दोबारा होने वाली परीक्षा पर टिक गया है। NTA ने स्पष्ट किया है कि परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता बहाल करने और छात्रों का भरोसा बनाए रखने के लिए यह कड़ा कदम उठाना अनिवार्य था। जांच एजेंसियों की शुरुआती रिपोर्टों ने परीक्षा की पवित्रता पर गंभीर सवाल खड़े किए थे, जिसके बाद मामले की गंभीरता को देखते हुए पूरी जांच अब केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) को सौंप दी गई है।
इस बड़े फर्जीवाड़े के तार राजस्थान की राजधानी जयपुर से जुड़ते नजर आ रहे हैं, जहाँ SOG ने बड़ी कार्रवाई करते हुए मनीष यादव और राकेश मंडावरिया नाम के दो युवकों को हिरासत में लिया है। सूत्रों के मुताबिक, मनीष यादव इस पूरे खेल का मास्टरमाइंड बताया जा रहा है, जबकि राकेश पर पेपर बांटने का आरोप है। शुरुआती तफ्तीश में यह चौंकाने वाला तथ्य सामने आया है कि पेपर जयपुर के उसी प्रिंटिंग प्रेस से लीक हुआ था जहाँ इसे छपने के लिए भेजा गया था। NTA ने साफ कर दिया है कि वह इस जांच में CBI को हर संभव सहयोग और दस्तावेज उपलब्ध कराएगा ताकि दोषियों पर सख्त कार्रवाई हो सके।
परीक्षा रद्द होने से लाखों परिवारों में उपजी निराशा को देखते हुए NTA ने छात्रों को बड़ी राहत भी दी है। दोबारा होने वाली परीक्षा के लिए अभ्यर्थियों को न तो नया पंजीकरण (Registration) कराना होगा और न ही कोई अतिरिक्त शुल्क देना होगा। मई 2026 सत्र के लिए जमा किया गया डेटा और आवंटित परीक्षा केंद्र ही आगामी परीक्षा में मान्य रहेंगे, जिसकी नई तारीखों और एडमिट कार्ड की घोषणा जल्द ही आधिकारिक वेबसाइट पर की जाएगी। एजेंसी ने छात्रों और अभिभावकों से अपील की है कि वे अफवाहों से दूर रहें और केवल आधिकारिक सूचनाओं पर ही विश्वास करें।
