तेहरान। पश्चिम एशिया में तनाव एक बेहद खतरनाक मोड़ पर पहुंच गया है। ईरान की सशस्त्र सेना के वरिष्ठ प्रवक्ता ब्रिगेडियर जनरल अबोलफजल शेकारची ने एक कड़ा रुख अपनाते हुए सीधे शब्दों में चेतावनी दी है कि यदि ईरान के सैन्य केंद्रों को निशाना बनाया गया, तो पूरे पश्चिम एशिया में मौजूद अमेरिकी सैन्य ठिकानों को इसके गंभीर परिणाम भुगतने होंगे। ईरानी मीडिया ‘आईआरआईबी’, ‘ईरान वायर’ और ‘फॉक्स न्यूज’ की रिपोर्टों के अनुसार, शेकारची ने साफ किया है कि इस रणनीतिक क्षेत्र, विशेषकर होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) में अस्थिरता और असुरक्षा की सबसे बड़ी वजह अमेरिकी सेना की मौजूदगी ही है। एक विशेष साक्षात्कार में उन्होंने जोर देकर कहा कि अमेरिका और इजरायल को इस क्षेत्र में दखल देने का कोई नैतिक या कानूनी अधिकार नहीं है, क्योंकि यह महत्वपूर्ण जलमार्ग पूरी तरह से ईरान के नियंत्रण में सुरक्षित है।
तनाव की यह आग केवल बयानों तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके पीछे हालिया सैन्य गतिविधियां हैं। दरअसल, अमेरिका ने पिछले कुछ दिनों में ईरान के दक्षिणी बंदरगाहों की नौसैनिक नाकाबंदी फिर से शुरू कर दी है और ईरान के दक्षिणी सैन्य ठिकानों पर हवाई हमले तेज कर दिए हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने फॉक्स न्यूज के माध्यम से बेहद आक्रामक लहजा अपनाते हुए चेतावनी दी है कि यदि कोई समझौता नहीं हुआ, तो आने वाला हफ्ता ईरान के लिए बेहद विनाशकारी साबित हो सकता है। ट्रंप के मुताबिक, अमेरिकी हमले अब ईरान के बुनियादी ढांचे जैसे कि पावर प्लांट और प्रमुख पुलों तक फैल जाएंगे।
इस अमेरिकी दबाव के जवाब में ईरान ने भी अपनी पूरी ताकत झोंकने का इरादा जता दिया है। ब्रिगेडियर जनरल शेकारची ने पड़ोसी देशों से ईरान का सहयोग करने की अपील करते हुए चेतावनी दी है कि यदि ईरान को कोई भी नुकसान पहुंचाया गया, तो क्षेत्र का पूरा अमेरिकी इंफ्रास्ट्रक्चर उनके निशाने पर होगा और ईरान सालों तक यह युद्ध लड़ने के लिए सक्षम है। ईरान की सबसे बड़ी ऑपरेशनल कमांड यूनिट, ‘खतम अल-अंबिया सेंट्रल हेडक्वार्टर’ ने भी इस सुर में सुर मिलाते हुए स्पष्ट कर दिया है कि अमेरिका द्वारा ईरान के तेल और गैस निर्यात मार्गों को निशाना बनाए जाने का सिलसिला यदि तुरंत नहीं थमा, तो क्षेत्र में अमेरिका और उसके सहयोगियों के तमाम हितों को मलबे में तब्दील कर दिया जाएगा। दोनों महाशक्तियों के इन तीखे तेवरों ने पूरे वैश्विक समुदाय को एक बड़े संकट मुहाने पर लाकर खड़ा कर दिया है।
