नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने देश को पहली हाइड्रोजन ट्रेन मिलने के ऐतिहासिक अवसर को आत्मनिर्भर भारत और सतत विकास की दिशा में एक बहुत बड़ा दिन बताया है। आज सुबह लगभग 11 बजे हरियाणा के जींद और सोनीपत के बीच चलने वाली इस देश की पहली स्वदेशी हाइड्रोजन ट्रेन को हरी झंडी दिखाए जाने से पहले, प्रधानमंत्री ने अपने सोशल मीडिया हैंडल ‘एक्स’ पर राष्ट्र को बधाई दी। उन्होंने लिखा, “आज भारत को पहली हाइड्रोजन ट्रेन मिलने का सपना साकार होने जा रहा है। यह आत्मनिर्भर भारत और सतत विकास की दिशा में एक बहुत बड़ा दिन है। मैं इससे जुड़े सभी लोगों को बहुत बधाई देता हूँ।”
अपने इस बधाई संदेश के साथ ही प्रधानमंत्री मोदी ने चाणक्य नीति के छठे अध्याय का 16वां श्लोक (सुभाषितम्) भी साझा किया ‘प्रभूतं कार्यमल्पं वा यन्नरः कर्तुमिच्छति। सर्वारम्भेण तत् कार्यं सिंहादेकं प्रचक्षते।।’ इस श्लोक के माध्यम से उन्होंने शेर से सीखे जाने वाले एक सबसे महत्वपूर्ण गुण का वर्णन करते हुए देशवासियों को प्रेरित किया। प्रधानमंत्री के संदेश के अनुसार, इसका अर्थ है कि मनुष्य जो भी कार्य करना चाहता है, चाहे वह बड़ा हो या छोटा, उसे अपनी पूरी शक्ति और लगन के साथ शुरू करना चाहिए; शेर से हमें यही एक गुण सीखना चाहिए।
प्रधानमंत्री मोदी के इसी विजन को साकार करती यह हाइड्रोजन ट्रेन आज सुबह हरियाणा के जींद रेलवे स्टेशन से रवाना होने के लिए तैयार है, जो रेलवे क्षेत्र में स्वच्छ और टिकाऊ परिवहन को अपनाने की दिशा में भारत का एक बड़ा कदम है। पूरी तरह स्वदेशी तकनीक से भारत में ही डिजाइन और इंजीनियर की गई यह ट्रेन देश की तकनीकी क्षमता को दर्शाती है, जिसके दम पर आज भारत दुनिया के उन चुनिंदा देशों के समूह में शामिल होने जा रहा है जिनके पास हाइड्रोजन-चालित ट्रेनें परिचालन में हैं। हाइड्रोजन फ्यूल सेल तकनीक से चलने वाली 10 कोच की यह ट्रेन शून्य कार्बन उत्सर्जन के साथ पर्यावरण को स्वच्छ रखने और जीवाश्म ईंधन पर निर्भरता कम करने का प्रधानमंत्री का सपना पूरा करेगी।
