वॉशिंगटन। होर्मुज जलडमरूमध्य में अमेरिकी नाकाबंदी के बाद हालात तेजी से बदलते नजर आ रहे हैं। ईरान और अमेरिका के बीच बढ़े तनाव के बीच अब दोनों पक्षों के रुख में नरमी के संकेत मिले हैं, जिससे परसों (गुरुवार) से दोबारा बातचीत शुरू होने की संभावना बन गई है।
दरअसल, इस्लामाबाद में हाल ही में हुई शांति वार्ता विफल होने के बाद अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कड़ा कदम उठाते हुए ईरान के बंदरगाहों की नाकाबंदी का ऐलान किया था। उन्होंने चेतावनी दी थी कि अगर कोई ईरानी जहाज प्रतिबंधित क्षेत्र में प्रवेश करता है तो उसे समुद्र में डुबो दिया जाएगा। इस सख्ती का असर अब दिखने लगा है और अमेरिकी अधिकारियों के मुताबिक, ईरान बातचीत के लिए तैयार होता दिख रहा है।
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, ट्रंप ने कहा कि ईरान ने बातचीत में रुचि दिखाई है। वहीं अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने साफ किया कि अब अगला कदम तेहरान को उठाना है। उनका मानना है कि दोनों देशों के बीच बड़ा समझौता संभव है।
इससे पहले अमेरिका ने ईरान के सामने 20 साल तक यूरेनियम संवर्धन रोकने का प्रस्ताव रखा था, लेकिन ईरान ने जवाब में इसे घटाकर 5 साल करने की बात कही है। यह मतभेद ही पिछली वार्ता के विफल होने की बड़ी वजह बना था।
हालांकि, बढ़ते तनाव और नाकाबंदी के खतरे को देखते हुए मध्यस्थ देशों ने एक बार फिर प्रयास तेज कर दिए हैं। सूत्रों के मुताबिक, संघर्ष विराम खत्म होने से पहले समझौता कराने के लिए गुरुवार से बातचीत फिर शुरू हो सकती है। संभावित मेजबान के तौर पर पाकिस्तान के साथ-साथ जिनेवा का नाम भी चर्चा में है।
उपराष्ट्रपति वेंस ने यह भी स्पष्ट किया कि पिछली वार्ता इसलिए टूटी क्योंकि ईरानी प्रतिनिधियों के पास अंतिम निर्णय लेने का अधिकार नहीं था। अब किसी भी प्रगति के लिए तेहरान की मंजूरी जरूरी होगी।
इस बीच ट्रंप ने संकेत दिए हैं कि यदि ईरान परमाणु हथियार बनाने की योजना छोड़ देता है, तो अमेरिका उसके साथ सामान्य संबंध स्थापित करने के लिए तैयार है। उन्होंने कहा कि ईरान को एक सामान्य और समृद्ध देश बनने का मौका मिल सकता है।
अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी इस मसले पर हलचल तेज हो गई है। ब्रिटेन के उप प्रधानमंत्री डेविड लैमी ने वॉशिंगटन में वेंस से मुलाकात कर संघर्ष विराम बनाए रखने पर जोर दिया। वहीं रूस ने भी एक बार फिर प्रस्ताव रखा है कि वह ईरान के समृद्ध यूरेनियम को अपने पास रखने के लिए तैयार है, ताकि समझौते का रास्ता आसान हो सके। क्रेमलिन के प्रवक्ता दिमित्री पेस्कोव ने कहा कि यह प्रस्ताव अभी भी खुला है।
उधर, क्षेत्रीय तनाव के बीच इजराइल और लेबनान के प्रतिनिधियों के बीच भी अमेरिका में अहम बैठक होने जा रही है, जो 1993 के बाद इस तरह की पहली पहल मानी जा रही है। हाल के दिनों में हिजबुल्लाह द्वारा इजराइल पर किए गए हमलों के बाद हालात और संवेदनशील हो गए हैं।
कुल मिलाकर, होर्मुज की नाकाबंदी ने जहां हालात को टकराव के कगार पर ला दिया था, वहीं अब यही दबाव कूटनीतिक समाधान की दिशा में रास्ता भी खोलता नजर आ रहा है। आने वाले दो दिन इस पूरे घटनाक्रम के लिए बेहद अहम साबित हो सकते हैं।
