अम्बिकापुर। थाली में मौजूद एक साधारण सा अंडा न सिर्फ संपूर्ण पोषण का भंडार है, बल्कि सेहत और ग्रामीण आजीविका की मजबूत बुनियाद भी है। वर्ष 1996 में शुरू हुआ ‘विश्व अंडा दिवस’ इस साल अपने सफर के तीन दशक पूरे कर रहा है। हर वर्ष अक्टूबर के दूसरे शुक्रवार को मनाए जाने वाले इस वैश्विक दिवस की 30वीं वर्षगांठ का मुख्य संदेश है। “Protein that Powers and Protects” (ऊर्जा देने और स्वास्थ्य की रक्षा करने वाला प्रोटीन)। इसका सीधा उद्देश्य जन-जन को अंडे में मौजूद अव्वल दर्जे के पोषण तत्वों के प्रति जागरूक करना है।
पशु पालन विभाग अम्बिकापुर के अतिरिक्त उप संचालक व वरिष्ठ पशु चिकित्सक डॉ. सी.के. मिश्रा के अनुसार, अंडा प्रकृति का सबसे सुलभ और उच्च गुणवत्ता वाला ‘कंप्लीट प्रोटीन’ स्रोत है। मानव शरीर जिन 9 आवश्यक अमीनो एसिड्स का स्वयं निर्माण नहीं कर पाता, वे सभी इसमें आदर्श अनुपात में मौजूद रहते हैं। यह अनूठा संयोजन मांसपेशियों के विकास, उत्तकों की मरम्मत और दिनभर की शारीरिक ऊर्जा के लिए रीढ़ की तरह काम करता है।
प्रोटीन के अलावा अंडा मस्तिष्क, तंत्रिका तंत्र और हड्डियों की मजबूती के लिए भी बेजोड़ है। इसमें मौजूद विटामिन D, विटामिन B12, सेलेनियम और ‘कोलीन’ शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता को नई ताकत देते हैं। डॉ. मिश्रा बताते हैं कि बढ़ते बच्चों के शारीरिक-मानसिक विकास से लेकर वयस्कों की फिटनेस और बुजुर्गों की सक्रिय जीवनशैली तक, अंडा हर आयु वर्ग के संतुलित आहार का एक जरूरी हिस्सा बन सकता है।
पोषण की इस थाली का सीधा रिश्ता सीधे खेत और खलिहान से भी जुड़ा है। यह दिवस केवल स्वास्थ्य चर्चा तक सीमित नहीं है, बल्कि पोल्ट्री उद्योग और अंडा उत्पादन से जुड़े लाखों किसानों व ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती देने का भी सशक्त जरिया है।
इस अवसर पर नागरिकों से आह्वान किया गया है कि वे पोषण के महत्व को पहचानें और चिकित्सक या आहार विशेषज्ञ के परामर्श से अपनी दैनिक डाइट में अंडे व अन्य पोषक तत्वों को शामिल कर एक सेहतमंद जीवन की नींव रखें।
