नई दिल्ली। मिडिल ईस्ट (मध्य पूर्व) में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव और वैश्विक अस्थिरता के बीच देश में रसोई गैस और जरूरी ईंधनों की किल्लत को लेकर उड़ रही तमाम अफवाहों को केंद्र सरकार ने सिरे से खारिज कर दिया है। देश की जनता को एक बड़ा भरोसा और सीधी राहत देते हुए सरकार ने स्पष्ट किया है कि वैश्विक चुनौतियों के बावजूद भारत में एलपीजी (LPG), पेट्रोल और डीजल की आपूर्ति श्रृंखला पूरी तरह सुदृढ़ और स्थिर है। आम जनता को घबराने या किसी भी तरह की जल्दबाजी में जरूरत से ज्यादा खरीदारी (पैनिक बाइंग) करने की रत्ती भर भी आवश्यकता नहीं है, क्योंकि देश के कोने-कोने में स्थित ईंधन स्टेशनों और गैस एजेंसियों के पास पर्याप्त मात्रा में स्टॉक सुरक्षित मौजूद है।
उच्च स्तरीय समीक्षा बैठक में अधिकारियों ने देश की ऊर्जा सुरक्षा को लेकर पुख्ता आंकड़े पेश किए हैं। सरकार ने नागरिकों से अपील की है कि वे सोशल मीडिया या अन्य माध्यमों से फैलने वाली निराधार अफवाहों पर ध्यान न दें और केवल आधिकारिक सूचनाओं पर ही भरोसा करें। इस बात का सबसे बड़ा प्रमाण यह है कि पिछले महज तीन दिनों के भीतर देशभर में रिकॉर्ड 1.32 करोड़ गैस सिलेंडरों की बुकिंग के मुकाबले रिकॉर्ड तोड़ 1.34 करोड़ सिलेंडरों की सफल डिलीवरी की गई है। इस दौरान देश के किसी भी हिस्से से या किसी भी गैस एजेंसी पर स्टॉक खत्म होने की एक भी शिकायत दर्ज नहीं की गई है, जो वितरण प्रणाली की मजबूती को दर्शाता है।
ईंधन के वितरण में पारदर्शिता लाने और गैस की चोरी व कालाबाजारी पर पूरी तरह लगाम लगाने के लिए सरकार ने बेहद कड़े और आधुनिक कदम उठाए हैं। वर्तमान में देश के 96 फीसदी एलपीजी सिलेंडरों की आपूर्ति ‘डिलीवरी ऑथेंटिकेशन कोड’ (DAC) यानी वन-टाइम पासवर्ड (OTP) प्रणाली के जरिए की जा रही है। इस तकनीक ने गैस की हेराफेरी की संभावनाओं को शून्य कर दिया है। इसके साथ ही डिजिटल इंडिया को बढ़ावा देते हुए देश में एलपीजी की ऑनलाइन बुकिंग का ग्राफ भी रिकॉर्ड 99 प्रतिशत तक पहुंच चुका है, जिससे उपभोक्ताओं को बिना किसी कतार या परेशानी के घर बैठे सेवाएं मिल रही हैं।
पारंपरिक ईंधन पर निर्भरता कम करने और पर्यावरण अनुकूल पीएनजी (पाइप्ड नेचुरल गैस) को बढ़ावा देने के सरकारी अभियान को भी अभूतपूर्व सफलता मिल रही है। आंकड़ों के अनुसार, स्वेच्छा से एलपीजी कनेक्शन सरेंडर करने के लिए बनाए गए आधिकारिक पोर्टल के जरिए 20 मई तक 58,500 से अधिक जागरूक उपभोक्ताओं ने अपने गैस कनेक्शन छोड़ दिए हैं। बुनियादी ढांचे के मोर्चे पर मार्च 2026 से लेकर अब तक देश के लगभग 7.64 लाख घरों में पीएनजी कनेक्शन को सक्रिय रूप से चालू कर दिया गया है, जबकि 2.81 लाख नए घरों तक इस सुविधा को पहुंचाने के लिए बुनियादी ढांचा पूरी तरह तैयार कर लिया गया है। इतना ही नहीं, देश के 22 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में बाजार की मांग को देखते हुए अतिरिक्त कमर्शियल एलपीजी कोटा भी आवंटित किया जा रहा है।
जमाखोरी और ब्लैक मार्केटिंग करने वाले असामाजिक तत्वों के खिलाफ सरकार ने देशव्यापी दंडात्मक अभियान भी छेड़ दिया है। पिछले तीन दिनों में देश भर में 5,000 से अधिक संदिग्ध ठिकानों पर ताबड़तोड़ छापेमारी की गई है। इसी कड़ी में सरकारी तेल कंपनियों ने कड़ा एक्शन लेते हुए 3,100 से ज्यादा पेट्रोल पंपों और गैस एजेंसियों का औचक निरीक्षण किया, जिसमें नियमों की अनदेखी करने वाली 463 गैस एजेंसियों पर भारी जुर्माना (पेनल्टी) लगाया गया है।
वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल (क्रूड ऑयल) की आसमान छूती कीमतों के सीधे असर से देश की आम जनता की जेब को बचाने के लिए केंद्र सरकार ने एक और बड़ा जनहितैषी कदम उठाया है। सरकार ने पेट्रोल और डीजल पर लगने वाली एक्साइज ड्यूटी (उत्पाद शुल्क) में सीधे 10 रुपये प्रति लीटर की ऐतिहासिक कटौती की घोषणा की है, जिससे घरेलू बाजार में ईंधन की कीमतें आम आदमी के बजट के अनुकूल बनी हुई हैं। वहीं, मिडिल ईस्ट के अशांत हालातों के बीच भारतीय समुद्री व्यापार के मोर्चे से भी राहत भरी खबर है। बंदरगाह और जहाजरानी मंत्रालय ने आधिकारिक पुष्टि की है कि खाड़ी क्षेत्र में समुद्री व्यापारिक मार्ग पूरी तरह सामान्य रूप से काम कर रहे हैं और वहां तैनात सभी भारतीय नाविक पूरी तरह सुरक्षित हैं, जिससे देश की आयात व्यवस्था पर कोई आंच नहीं आने वाली है।
