कोलकाता। पश्चिम बंगाल की राजधानी कोलकाता के ऐतिहासिक ब्रिगेड परेड ग्राउंड में आज एक नया राजनीतिक इतिहास रचा गया, जब शुभेंदु अधिकारी के नेतृत्व में पश्चिम बंगाल में पहली बार भारतीय जनता पार्टी की सरकार ने शपथ ली। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की गरिमामयी उपस्थिति में आयोजित इस भव्य समारोह में शुभेंदु अधिकारी ने मुख्यमंत्री पद की शपथ लेकर राज्य में सत्ता परिवर्तन पर मुहर लगा दी।
नई सरकार के गठन में क्षेत्रीय समीकरणों और अनुभव के मेल पर विशेष ध्यान दिया गया है। इसी क्रम में आसनसोल दक्षिण की विधायक अग्निमित्रा पॉल का नाम सबसे अधिक चर्चा में रहा, जिन्होंने शुभेंदु अधिकारी और दिलीप घोष के ठीक बाद तीसरे नंबर पर पद एवं गोपनीयता की शपथ ली। राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि उनकी वरिष्ठता और सांगठनिक कौशल को देखते हुए उन्हें किसी महत्वपूर्ण विभाग की जिम्मेदारी सौंपी जा सकती है।
अग्निमित्रा पॉल का मंत्री पद तक का सफर बेहद दिलचस्प और प्रेरणादायी रहा है। राजनीति के मैदान में कदम रखने से पहले वह फैशन जगत का एक जाना-माना नाम थीं। नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ फैशन टेक्नोलॉजी (NIFT) से स्नातक पॉल ने एक सफल उद्यमी के रूप में अपना खुद का ब्रांड स्थापित किया और कोलकाता के फैशन मंचों पर अपनी रचनात्मकता का लोहा मनवाया।
हालांकि, साल 2019 में उन्होंने ग्लैमर की दुनिया छोड़ जनसेवा का रास्ता चुना और भाजपा में शामिल हो गईं। उन्होंने बहुत कम समय में पार्टी की बंगाल इकाई में अपनी मजबूत पहचान बनाई। 2021 के विधानसभा चुनाव में उन्होंने आसनसोल दक्षिण सीट पर तृणमूल कांग्रेस की सायनी घोष को एक कड़े मुकाबले में हराकर पहली बार विधानसभा में कदम रखा। उनकी लोकप्रियता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि 2026 के चुनावों में भी उन्होंने टीएमसी के तापस बनर्जी को शिकस्त देकर अपनी सीट सुरक्षित रखी।
हालांकि अग्निमित्रा को चुनावी राजनीति में उतार-चढ़ाव का भी सामना करना पड़ा। वह 2024 के लोकसभा चुनाव में मेदिनीपुर सीट से और 2022 के आसनसोल उपचुनाव में शत्रुघ्न सिन्हा के खिलाफ चुनावी मैदान में उतरीं, लेकिन इन दोनों ही मौकों पर उन्हें सफलता नहीं मिली। इसके बावजूद पार्टी नेतृत्व ने उनके जुझारू व्यक्तित्व पर भरोसा कायम रखा, जिसका प्रतिफल आज उन्हें कैबिनेट मंत्री के रूप में मिला है। नई सरकार में उनके साथ दिलीप घोष, खुदीराम टुडू, अशोक कीर्तनिया और पूर्व केंद्रीय मंत्री निशीथ प्रामाणिक जैसे अनुभवी चेहरों को भी जगह दी गई है।
शपथ ग्रहण के बाद मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने अपने संबोधन में ‘सामूहिक नेतृत्व’ और ‘भ्रष्टाचार मुक्त बंगाल’ का संकल्प दोहराया। उन्होंने स्पष्ट किया कि राज्य में हुए पिछले घोटालों की जांच के लिए एक सेवानिवृत्त जज की अध्यक्षता में विशेष आयोग का गठन किया जाएगा। संदेशखाली से लेकर आर.जी. कर मेडिकल कॉलेज जैसे संवेदनशील मामलों का जिक्र करते हुए उन्होंने वादा किया कि नई सरकार इन मामलों में त्वरित कार्रवाई कर जनता को न्याय दिलाएगी। यह शपथ ग्रहण समारोह न केवल एक सरकार का बदलाव है, बल्कि बंगाल की राजनीति में एक नए अध्याय की शुरुआत माना जा रहा है।
