सूरजपुर। जिले के प्रेमनगर ब्लॉक अंतर्गत ग्राम बरमपुर के वार्ड क्रमांक एक (करनामुड़ा) में विकास के दावे खोखले साबित हो रहे हैं। यहाँ ग्रामीण आज के आधुनिक दौर में भी पेयजल जैसी मूलभूत सुविधा के लिए तरस रहे हैं और एक किलोमीटर पैदल चलकर पानी लाने को मजबूर हैं। विडंबना यह है कि समस्या सिर्फ पानी तक सीमित नहीं है; गाँव के बच्चों का भविष्य संवारने वाला आंगनवाड़ी भवन जर्जर हो चुका है, जिससे हर वक्त दुर्घटना का भय बना रहता है। आवागमन के लिए नवापारा मुख्य मार्ग से कलेशर तक की सड़क अपनी बदहाली पर आंसू बहा रही है।
सरकारी योजनाओं का लाभ पहुँचाने के दावों के बीच कई पात्र महिलाएं महतारी वंदन योजना से वंचित हैं, तो वहीं कई ग्रामीण नवीन राशन कार्ड बनवाने के लिए दफ्तरों के चक्कर काट रहे हैं। भ्रष्टाचार की गूँज भी यहाँ सुनाई दे रही है, जहाँ ग्रामीणों ने प्रधानमंत्री आवास योजना की राशि में घोटाले के गंभीर आरोप लगाए हैं। इन तमाम समस्याओं को लेकर ग्रामीणों ने सरपंच और सचिव से लेकर विधायक, सांसद, मंत्री और कलेक्टर तक कई बार लिखित शिकायतें की हैं, लेकिन परिणाम शून्य रहा है।
चुनाव के समय बड़े-बड़े वादे करने वाले जनप्रतिनिधि जीत के तीन साल बीत जाने के बाद भी मुड़कर देखने नहीं आए। सत्ता की चौखट पर बार-बार दस्तक देने के बाद अब ग्रामीणों की उम्मीदें मीडिया पर टिकी हैं। ग्रामीण इस बात से क्षुब्ध हैं कि चुनाव के बाद नेता उनकी बुनियादी जरूरतों को भूल गए हैं। अब देखना यह होगा कि इस खबर के माध्यम से प्रशासन की नींद टूटती है या बरमपुर के ग्रामीण यूँ ही बदहाली में जीवन जीने को विवश रहेंगे।
