जांजगीर-चांपा। जिले में अवैध रूप से रह रहे बाहरी व्यक्तियों और संदिग्ध अप्रवासियों को लेकर आखिरकार पुलिस हरकत में आई है। पुलिस अधीक्षक विजय कुमार पाण्डेय ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर मकान मालिकों, होटल संचालकों, राइस मिलों, फैक्ट्रियों और ठेकेदारों से अनिवार्य पुलिस सत्यापन कराने की अपील की है। साथ ही सूचना देने के लिए टोल-फ्री नंबर और कंट्रोल रूम नंबर भी जारी किया गया है।
हालांकि बड़ा सवाल यह है कि जब लंबे समय से जिले में बाहरी लोगों के रहने और बिना सत्यापन काम करने की शिकायतें सामने आती रही हैं, तब पुलिस ने पहले प्रभावी अभियान क्यों नहीं चलाया? कई इलाकों में किरायेदारों और मजदूरों का पुलिस सत्यापन नहीं होने की बात सामने आती रही, लेकिन कार्रवाई बेहद सीमित रही। अब जब मामला गंभीर होता दिख रहा है, तब पुलिस सक्रिय नजर आ रही है।
पुलिस ने चेतावनी दी है कि किरायेदारों की जानकारी नहीं देने वाले मकान मालिकों के खिलाफ धारा 224 बीएनएस के तहत कार्रवाई होगी। लेकिन लोगों का सवाल है कि यदि पहले से सूचना और शिकायतें मिलती रही हैं, तो लापरवाही बरतने वालों पर अब तक क्या कार्रवाई हुई?
एसपी ने नागरिकों से अपील की है कि संदिग्ध व्यक्तियों की सूचना टोल-फ्री नंबर 1800-233-1905, कंट्रोल रूम 9479193199 या आपातकालीन नंबर 112 पर दें। जानकारी देने वाले का नाम गोपनीय रखने का भरोसा भी दिया गया है। अब देखना होगा कि यह अभियान केवल प्रेस कॉन्फ्रेंस और अपील तक सीमित रहता है या वास्तव में जिले में बिना सत्यापन रह रहे बाहरी लोगों के खिलाफ व्यापक जांच और कार्रवाई भी होती है।
कंट्रोल रूम प्रभारी जानकारी देने के बजाय अनभिज्ञता जाहिर की…
जिले में अवैध रूप से रह रहे अप्रवासियों की सूचना देने के लिए पुलिस द्वारा जारी कंट्रोल रूम नंबर पर भी लापरवाही सामने आई। जानकारी लेने के लिए जब कंट्रोल रूम प्रभारी से संपर्क किया गया तो उन्होंने स्पष्ट जानकारी देने के बजाय अनभिज्ञता जाहिर कर दी। जबकि पुलिस अधीक्षक स्वयं प्रेस कॉन्फ्रेंस कर टोल-फ्री नंबर और कंट्रोल रूम के माध्यम से सूचना देने की अपील कर चुके हैं। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि जब कंट्रोल रूम प्रभारी को ही अभियान की जानकारी नहीं है, तो आम नागरिकों से सूचना देने की उम्मीद कैसे की जा सकती है। यह मामला पुलिस की आंतरिक समन्वय व्यवस्था पर भी सवाल खड़े करता है।
