अम्बिकापुर। छत्तीसगढ़ के अंबिकापुर शहर में पेट्रोल और डीजल की किल्लत ने वाहन चालकों की चिंता बढ़ा दी है, जहां कई पेट्रोल पंपों पर ईंधन का स्टॉक खत्म होने की कगार पर पहुंच गया है। हालात इस कदर बिगड़ चुके हैं कि तेल की जमाखोरी रोकने और सीमित स्टॉक को सभी तक पहुंचाने के लिए पंप संचालकों ने ईंधन की बिक्री पर सख्त सीमा (राशनिंग) लगा दी है। अब दोपहिया वाहनों को अधिकतम 200 रुपये और चारपहिया वाहनों को महज 400 रुपये तक का ही पेट्रोल-डीजल दिया जा रहा है। इस अचानक पैदा हुए संकट के कारण अपनी गाड़ियों के टैंक फुल कराने पहुंचे लोग मायूस होकर एक पंप से दूसरे पंप भटकने को मजबूर हैं, जबकि कई प्रमुख केंद्रों पर ‘पेट्रोल नहीं है’ के बोर्ड लटकते नजर आ रहे हैं।
इस स्थानीय संकट के बीच, भारत सरकार के पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने 11 जून 2026 को ईंधन वितरण को लेकर देशव्यापी कड़े निर्देश जारी कर दिए हैं। नए आदेश के तहत अब औद्योगिक, वाणिज्यिक और संस्थागत जैसे बड़े उपभोक्ता खुदरा पेट्रोल पंपों से सीधे ईंधन नहीं खरीद सकेंगे; उन्हें अपनी जरूरतें केवल अधिकृत उपभोक्ता पंपों के माध्यम से ही पूरी करनी होंगी। आम उपभोक्ताओं को राहत देने और बड़े पैमाने पर होने वाली जमाखोरी को रोकने के लिए मंत्रालय ने किसी भी एक वाहन या ग्राहक के लिए एक दिन में अधिकतम 200 लीटर डीजल की सीमा तय कर दी है, साथ ही खरीदे गए डीजल को दोबारा बेचने (पुनर्विक्रय) पर पूरी तरह प्रतिबंध लगा दिया है।
केंद्र सरकार ने इस पूरी व्यवस्था को पारदर्शी बनाए रखने के लिए राज्यों को सख्त कदम उठाने के निर्देश दिए हैं, जिसके तहत ईंधन की कालाबाजारी, अनधिकृत भंडारण और वितरण में गड़बड़ी करने वालों पर सीधे कानूनी कार्रवाई की जाएगी। तेल कंपनियों और डीलरों को इन नियमों का कड़ाई से पालन करने को कहा गया है। हालांकि स्थानीय प्रशासन और तेल विपणन कंपनियां अम्बिकापुर में आपूर्ति व्यवस्था को दोबारा पटरी पर लाने की कोशिशों में जुटी हैं, लेकिन जमीनी स्तर पर आम जनता को राहत मिलने में अभी कुछ दिनों का समय और लग सकता है।
