अम्बिकापुर। पश्चिम बंगाल के चुनावी नतीजों के बाद पैदा हुआ राजनीतिक गतिरोध अब राष्ट्रीय चर्चा का विषय बन गया है। मुख्यमंत्री ममता बनर्जी द्वारा हार के बावजूद पद न छोड़ने के फैसले पर छत्तीसगढ़ के पूर्व उपमुख्यमंत्री टीएस सिंहदेव ने कड़ा ऐतराज जताया है। अम्बिकापुर में मीडिया से चर्चा के दौरान सिंहदेव ने स्पष्ट रूप से कहा कि लोकतांत्रिक और संवैधानिक व्यवस्था में हार के बाद पद पर बने रहने का कोई प्रावधान नहीं है।
उन्होंने ममता बनर्जी के इस रुख पर आश्चर्य व्यक्त करते हुए कहा कि सदन का कार्यकाल मात्र 5 साल का होता है और समय सीमा समाप्त होने के बाद सत्ता पर दावा करना संवैधानिक नैतिकता के परे है। सिंहदेव के अनुसार, यह राज्यपाल का विशेषाधिकार है कि वे बहुमत प्राप्त करने वाले दल को सरकार बनाने के लिए आमंत्रित करें।
इस पूरे प्रकरण पर कानूनी विशेषज्ञों की राय भी सिंहदेव के तर्कों का समर्थन करती नजर आती है। पूर्व अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल पिंकी आनंद का मानना है कि जब कोई मुख्यमंत्री अपनी सीट और जनता का विश्वास दोनों खो देता है, तो पद पर बने रहने की जिद करना संवैधानिक मानदंडों के विपरीत है। उनके अनुसार, यदि ममता बनर्जी स्वेच्छा से पद नहीं त्यागती हैं, तो राज्यपाल के पास ‘फ्लोर टेस्ट’ का आदेश देने की शक्ति है।
चूंकि विधानसभा का कार्यकाल 7 मई को समाप्त हो जाएगा, इसलिए तकनीकी रूप से सभी सीटें खाली मानी जाएंगी। ऐसी स्थिति में जनता के जनादेश को चुनौती देना न केवल राजनीतिक रूप से गलत है, बल्कि यह देश की लोकतांत्रिक संस्थाओं की गरिमा को भी ठेस पहुँचाता है। अब सबकी नजरें राजभवन पर टिकी हैं कि संवैधानिक संकट को टालने के लिए अगला कदम क्या उठाया जाता है।
