रायपुर। छत्तीसगढ़ की राजनीति में इस वक्त बिजली बिलों की गड़बड़ी, लगातार बढ़ती दरें और स्मार्ट मीटर का मुद्दा एक बड़े सियासी तूफान का रूप ले चुका है। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज ने भाजपा सरकार के खिलाफ सीधे तौर पर ‘आर-पार’ की जंग का ऐलान करते हुए साफ कर दिया है कि अब यह संघर्ष सिर्फ बयानों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि सड़क से लेकर विधानसभा के सदन तक गूंजेगा। कांग्रेस का सीधा आरोप है कि यह सरकार आम जनता की जेब पर डाका डालकर आर्थिक बोझ बढ़ा रही है, जबकि इसकी नीतियां केवल चुनिंदा उद्योगपतियों और बड़े कॉर्पोरेट समूहों को फायदा पहुंचाने के लिए बनाई जा रही हैं।
इस तानाशाही और जनविरोधी नीतियों के खिलाफ विपक्ष ने एक बेहद आक्रामक और चरणबद्ध आंदोलन का खाका खींच दिया है, जिसकी शुरुआत 17 जून को प्रदेश के सभी जिला मुख्यालयों में बिजली कार्यालयों के उग्र घेराव और मुख्यमंत्री का पुतला दहन करके होने जा रही है। इसके ठीक अगले दिन, यानी 18 जून को कांग्रेस जिला स्तर पर प्रेस कॉन्फ्रेंस कर जनता की अदालत में सरकार की नाकामियों का पूरा कच्चा चिट्ठा खोलेगी, और जुलाई के पहले सप्ताह में कांग्रेस कार्यकर्ता सीधे जनता के घरों तक पहुंचकर स्मार्ट मीटरों को उखाड़ फेंकने के समर्थन में एक बड़ा हस्ताक्षर और आवेदन अभियान चलाएंगे।
इस पूरे आंदोलन की कमान संभाल रहे दीपक बैज ने जमीनी हकीकत बयां करते हुए कहा कि आज प्रदेश का हर आम उपभोक्ता बिजली दफ्तरों के चक्कर काट-काटकर थक चुका है, लेकिन उनकी ऑनलाइन और ऑफलाइन बिलों की विसंगतियों को सुधारने वाला कोई नहीं है। उन्होंने चेतावनी दी है कि जनता का यह आक्रोश जल्द ही एक बड़े जन आंदोलन में तब्दील हो जाएगा क्योंकि लोग अब दोहरी मार झेल रहे हैं एक तरफ भीषण बिजली कटौती और दूसरी तरफ सामान्य से तीन गुना तक बढ़कर आ रहे भारी-भरकम बिल। कांग्रेस ने सवाल उठाया है कि जिस पुराने मीटर में कोई तकनीकी खराबी नहीं थी, उसे हटाकर जबरन स्मार्ट मीटर क्यों थोपे जा रहे हैं, जबकि स्मार्ट मीटर लगते ही खपत और बिल दोनों में रहस्यमयी उछाल आ रहा है।
उत्तर प्रदेश का उदाहरण देते हुए बैज ने मांग की है कि वहां की तरह छत्तीसगढ़ में भी स्मार्ट मीटर के फैसलों की तत्काल समीक्षा होनी चाहिए। कांग्रेस ने आंकड़ों का हवाला देते हुए आरोप लगाया कि भाजपा सरकार ने सत्ता में आते ही पांचवीं बार बिजली दरों में बढ़ोतरी की है, जिसके तहत घरेलू उपभोक्ताओं पर 30 से 50 पैसे, गैर-घरेलू पर 20 से 40 पैसे और किसानों के कृषि पंपों पर 40 पैसे प्रति यूनिट का सीधा डाका डाला गया है, जिससे कुल बिजली दरें 31.23 प्रतिशत तक महंगी हो चुकी हैं। बैज ने सरकार की ‘महतारी वंदन योजना’ पर भी तीखा तंज कसते हुए कहा कि यह सरकार एक हाथ से बहनों को हजार रुपये की भीख दे रही है और दूसरे हाथ से बढ़े हुए बिजली बिलों के जरिए उससे कई गुना ज्यादा वापस वसूल रही है।
बिजली के इस करंट की तपिश अब आगामी 13 जुलाई से शुरू होने वाले विधानसभा के मानसून सत्र को भी पूरी तरह दहलाने वाली है। विपक्ष ने साफ कर दिया है कि सदन के भीतर नेता प्रतिपक्ष चरणदास महंत, पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल और कांग्रेस का पूरा विधायक दल इस मुद्दे पर सरकार को एक इंच भी भागने का मौका नहीं देगा। दीपक बैज ने एक बड़ा नीतिगत सवाल दागते हुए पूछा कि जो छत्तीसगढ़ देश का प्रमुख बिजली और कोयला उत्पादक राज्य है, जहां संसाधनों की कोई कमी नहीं है, वहां की जनता को इतनी महंगी बिजली क्यों दी जा रही है?
उन्होंने याद दिलाया कि कांग्रेस के पांच साल के कार्यकाल में बिजली दरों में महज दो पैसे प्रति यूनिट की बढ़ोतरी हुई थी और ‘बिजली बिल हाफ योजना’ के जरिए 400 यूनिट तक आधी दुनिया को सीधे राहत मिलती थी, लेकिन आज उपभोक्ताओं की जानकारी के बिना उनका अनुबंध भार (load) बढ़ाकर अतिरिक्त शुल्क वसूला जा रहा है। मानसून सत्र में कांग्रेस न सिर्फ बिजली, बल्कि पेट्रोल, डीजल और खाद की किल्लत और बढ़ती कीमतों को लेकर भी सरकार की घेराबंदी करेगी, जिससे आने वाले दिनों में प्रदेश की सियासत का पारा चरम पर पहुंचना तय है।
