अम्बिकापुर। सरगुजा जिले के सीतापुर नगर से होकर गुजरने वाला नेशनल हाईवे-43 इस मानसून में राहगीरों के लिए खूनी ट्रैक बन चुका है। ग्राम पंचायत सोनातराई से सुर तक फैले लगभग तीन किलोमीटर के इस दायरे में हाईवे कम और जलमग्न खड्डों का जाल ज्यादा नजर आता है। विशेष रूप से सोनातराई के पास आधा किलोमीटर का टुकड़ा इतना खस्ताहाल है कि वाहन चालकों के लिए यहाँ से गुजरना किसी जंग जीतने से कम नहीं। मरम्मत के अभाव में बद से बदतर हो चुकी इस सड़क पर रोजाना बाइक सवार और राहगीर हादसों का शिकार होकर अस्पताल पहुँच रहे हैं, लेकिन जिम्मेदार महकमा कुंभकर्णी नींद में सोया हुआ है।
हाल ही में घटी एक खौफनाक घटना इस बदहाली की जीती-जागती मिसाल है। स्कूल जा रही एक महिला शिक्षक की स्कूटी सोनातराई के पास जलभराव वाले एक गहरे गड्ढे में अनियंत्रित होकर पलट गई। महिला शिक्षक स्कूटी समेत गहरे पानी में समा गईं। गनीमत यह रही कि आसपास मौजूद ग्रामीणों ने तत्परता दिखाते हुए उन्हें तुरंत बाहर निकाल लिया और उस वक्त पीछे से कोई भारी वाहन नहीं आ रहा था, वरना एक बड़ा हादसा तय था। इसके बावजूद, शहर के बीच से गुजरने वाले इस तीन किलोमीटर लंबे जानलेवा रास्ते को लेकर संबंधित अधिकारी किसी बड़े हादसे का इंतजार करते दिख रहे हैं।
स्थानीय निवासियों का आरोप है कि बारिश से ठीक पहले विभाग ने मरम्मत के नाम पर सिर्फ ‘थूक-पॉलिश’ और लीपापोती की थी। ठेकेदार द्वारा किए गए घटिया निर्माण पर ग्रामीणों ने ऐतराज भी जताया था, लेकिन अधिकारियों ने जनभावनाओं को सिरे से खारिज कर दिया। सबसे बड़ी तकनीकी खामी यह है कि हाईवे के दोनों ओर जल निकासी (ड्रेनेज) का कोई इंतजाम नहीं है। दशकों पुरानी इस समस्या के कारण बारिश का पानी सड़कों पर ही जमा रहता है, जिससे डामर उखड़ जाता है। हर साल करोड़ों के बजट के बावजूद इस स्थायी बीमारी का इलाज ढूंढने में प्रशासन पूरी तरह नाकाम साबित हुआ है।
मामले में प्रशासनिक रवैये पर सवाल उठने के बाद एसडीएम फागेश सिन्हा ने सफाई दी है। उनका कहना है कि संबंधित विभागीय अधिकारियों से चर्चा की गई है। बारिश के कारण फिलहाल डामरीकरण या मरम्मत का काम संभव नहीं हो पा रहा है। जैसे ही बारिश थमेगी, सड़क का जीर्णोद्धार का काम प्राथमिकता के आधार पर शुरू करा दिया जाएगा। हालांकि, तब तक अपनी जान जोखिम में डालकर सफर करना आम जनता की मजबूरी बनी हुई है।
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