जांजगीर-चांपा। शहर में पारंपरिक जुआ-सट्टे का स्वरूप अब हाईटेक हो चुका है। आरोप है कि BDG ऑनलाइन सट्टा ऐप के जरिए मोबाइल नंबर, WhatsApp ग्रुप, Telegram चैनल और डिजिटल करेंसी USDT के माध्यम से बड़े पैमाने पर लेन-देन किया जा रहा है। पुलिस ने इस नेटवर्क से जुड़े छह लोगों को गिरफ्तार कर कार्रवाई कुछ दिनों पहले किया था , लेकिन कार्रवाई के बाद भी सबसे बड़ा सवाल यही है कि इस पूरे नेटवर्क के असली मास्टरमाइंड और बड़े स्तर के संचालक आखिर पुलिस की पकड़ से बाहर क्यों हैं?
पुलिस कार्रवाई में अब तक मास्टर आईडी, एडमिन और आईडी होल्डर्स से जुड़े छह आरोपियों को गिरफ्तार किए जाने की जानकारी सामने आई है। जो स्थानीय दुकानदार और शहर के निवासी भी शामिल बताए जा रहे हैं। हालांकि, जांच का दायरा यदि सिर्फ छोटे स्तर के आईडी होल्डर्स तक सीमित रहा तो इस हाईटेक सट्टा नेटवर्क की पूरी कड़ी सामने आना मुश्किल है।
नीचे छोटे खिलाड़ी, ऊपर कौन?
बताया जा रहा है कि BDG ऐप की मास्टर आईडी और लिंक WhatsApp के माध्यम से दूसरे लोगों तक पहुंचाए जाते थे। इसके बाद नेटवर्क में नए लोगों को जोड़कर कमीशन का खेल चलता था। नीचे जुड़ा व्यक्ति जितना अधिक सट्टे में पैसा लगाता, ऊपर बैठे एडमिन अथवा संचालक को उतना ही कमीशन मिलने की बात सामने आई है।
यही नेटवर्क यदि बड़े स्तर पर संचालित हो रहा था तो जांच का सवाल केवल छह गिरफ्तार आरोपियों तक सीमित नहीं रह सकता। किसने मास्टर आईडी उपलब्ध कराई, रकम कहां जमा हुई, डिजिटल भुगतान किसके खातों तक पहुंचा और दूसरे राज्यों से कौन-कौन जुड़े हैं,इन सवालों के जवाब जांच की दिशा तय कर सकते हैं।
पुलिसकर्मी और सरकारी कर्मचारियों की भूमिका की भी हो जांच…
स्थानीय स्तर पर यह भी चर्चा है कि इस नेटवर्क से कुछ पुलिस आरक्षकों, शिक्षकों तथा अन्य अधिकारी-कर्मचारियों के जुड़े होने के आरोप लगाए जा रहे हैं। हालांकि, यह जांच का विषय हैं. यदि पुलिस के पास ऐसे लोगों की संलिप्तता से संबंधित ठोस डिजिटल या वित्तीय साक्ष्य हैं, तो उनकी भूमिका की निष्पक्ष जांच कर कार्रवाई की जानी चाहिए। सवाल यह भी है कि सायबर टीम की नजर नेटवर्क के केवल निचले स्तर तक है या वास्तविक मेन संचालकों तक भी पहुंच रही है।
दूसरे राज्यों से कनेक्शन की भी पड़ताल जरूरी…
ऑनलाइन सट्टे के डिजिटल नेटवर्क को देखते हुए दूसरे राज्यों में बैठे संचालकों, पेमेंट चैनल, बैंक खातों, मोबाइल नंबरों, IP लॉग, चैट और डिजिटल करेंसी लेन-देन की जांच महत्वपूर्ण हो जाती है। अगर पूरा नेटवर्क दूसरे राज्य से संचालित हो रहा है तो स्थानीय स्तर पर छह लोगों की गिरफ्तारी के बाद भी असली नेटवर्क तक पुलिस क्यों नहीं पहुंच पा रही हैं ।
पुलिस ने आम जनता से ऑनलाइन सट्टा, जुआ और ऐप आधारित वित्तीय धोखाधड़ी के प्रलोभन से बचने की अपील की है और कहा है कि ऐसे अवैध कृत्यों में संलिप्त लोगों के खिलाफ कार्रवाई जारी रहेगी। अब देखना यह होगा कि यह कार्रवाई छोटे खिलाड़ियों तक सीमित रहती है या जांच की कड़ी मास्टरमाइंड और पूरे नेटवर्क तक पहुंचती है।
