सुकमा। जिले का सुदूरवर्ती गांव पूवर्ती, जो कभी खूंखार नक्सली कमांडरों माड़वी हिड़मा और देवा बारसे की दहशत के लिए जाना जाता था, आज राज्य में बदलाव और प्रशासनिक संकल्प की नई मिसाल बन चुका है। दशकों के डर और सन्नाटे को चीरते हुए प्रशासन ने इस ‘अभेद्य’ माने जाने वाले क्षेत्र में पहली बार न केवल कदम रखा, बल्कि रिकॉर्ड समय में जनगणना का ऐतिहासिक कार्य भी संपन्न किया। हिड़मा की मुठभेड़ में मौत और देवा के आत्मसमर्पण के बाद बदले हालातों ने प्रशासन के लिए विकास के द्वार खोल दिए हैं, जिसका परिणाम यह है कि पूवर्ती अब सुकमा जिले में सबसे पहले जनगणना पूरी करने वाला गांव बन गया है।
लगभग 950 से अधिक की आबादी और 234 मकानों वाले इस गांव में सरकारी टीम का पहुँचना किसी चुनौती से कम नहीं था। कोंटा विकासखंड के अंतर्गत आने वाले इस संवेदनशील क्षेत्र में सहायक शिक्षक जवाराम पटेल ने महज तीन दिनों में इस दुर्गम लक्ष्य को हासिल कर लिया। हालांकि, गोंडी बोली और स्थानीय संवाद की चुनौतियाँ सामने आईं, लेकिन स्थानीय शिक्षकों के सहयोग से टीम ने हर दहलीज तक पहुँच सुनिश्चित की। गांव की इस पहली आधिकारिक गिनती ने न केवल शासन को जनसंख्या के सटीक आँकड़े दिए हैं, बल्कि वहां संचालित दो आंगनबाड़ी केंद्रों और एक स्कूल के माध्यम से शिक्षा और स्वास्थ्य की बुनियाद को भी मजबूती दी है।
कलेक्टर अमित कुमार ने इस साहसिक कार्य की सराहना करते हुए इसे अन्य कर्मचारियों के लिए प्रेरणा बताया है, क्योंकि जहां कभी सुरक्षा बलों और नक्सलियों के बीच मुठभेड़ की खबरें आती थीं, वहां अब सुनहरे भविष्य की रूपरेखा तैयार की जा रही है।
