धमतरी। छत्तीसगढ़ के धमतरी में नए शैक्षणिक सत्र की शुरुआत के साथ ही स्कूली किताबों की किल्लत को लेकर बवाल खड़ा हो गया है। बच्चों को समय पर पाठ्यपुस्तकें न मिलने से नाराज ‘निजी विद्यालय प्रबंधक कल्याण संघ’ ने गुरुवार को कलेक्ट्रेट परिसर का घेराव कर जोरदार प्रदर्शन किया। जिले के करीब 125 निजी स्कूलों के एक हजार से अधिक शिक्षक, शिक्षिकाएं और स्कूल संचालक इस आक्रोशित प्रदर्शन में शामिल हुए। प्रदर्शनकारियों ने राज्य पाठ्यपुस्तक निगम की लचर कार्यप्रणाली के खिलाफ जमकर नारेबाजी की और मुख्यमंत्री के नाम जिला प्रशासन को ज्ञापन सौंपकर जिम्मेदार अधिकारियों पर सख्त कार्रवाई की मांग की।
स्कूल प्रबंधकों का सीधा आरोप है कि पाठ्यपुस्तकों के वितरण में पिछले दो वर्षों से लगातार घोर लापरवाही बरती जा रही है, जिससे नौनिहालों का भविष्य अधर में लटक गया है। संघ के पदाधिकारियों ने साफ कहा कि राज्य शासन पहले सालों तक समय पर मुफ्त किताबें देता रहा है, तब कभी ऐसी नौबत नहीं आई। मगर बीते दो सत्रों से पुस्तक निगम के अधिकारियों की उदासीनता और अव्यवस्था के कारण स्कूल खुलने के महीनों बाद तक किताबें नहीं मिल पा रही हैं। हालत यह थी कि शैक्षणिक सत्र 2025-26 में कई स्कूलों को सितंबर महीने तक पूरी किताबें नसीब नहीं हुई थीं, जबकि कुछ विषयों की पुस्तकें तो पूरे सत्र के दौरान डिपो में ही धूल खाती रहीं।
इस अव्यवस्था के पीछे वितरण नीति में किए गए मनमाने बदलावों को बड़ी वजह बताया जा रहा है। पहले अशासकीय स्कूलों को जिला स्तर पर ही किताबें मिल जाती थीं, लेकिन अब उन्हें दूरस्थ डिपो से चक्कर काटने पर मजबूर किया जा रहा है। इसके ऊपर से बारकोड स्कैनिंग की कछुआ चाल वाली नई व्यवस्था ने कोढ़ में खाज का काम किया है, जिसके चलते किताबें डिपो पहुंचने के बाद भी हफ्तों तक विद्यार्थियों के हाथों में नहीं पहुंच पातीं। अधिकारियों ने बैठक में भरोसा दिया था कि सत्र 2026-27 से व्यवस्था सुधारी जाएगी और संकुल स्तर पर वितरण होगा, लेकिन जमीनी हकीकत आज भी जस की तस बनी हुई है।
16 जून से नया शिक्षण सत्र शुरू हो चुका है, लेकिन हालात यह हैं कि सरकारी स्कूलों को भी 15 जून तक सिर्फ आंशिक किताबें ही मिल सकी हैं। वहीं निजी स्कूलों के लिए वितरण की तारीख 21 जुलाई तय की गई है, जिसका सीधा मतलब है कि बच्चे डेढ़ महीने बिना किताबों के ही स्कूल जाने को मजबूर रहेंगे। संघ ने दो टूक चेतावनी दी है कि अगर इस समयबद्ध वितरण व्यवस्था को तुरंत दुरुस्त नहीं किया गया, तो धमतरी से उठी यह चिंगारी जल्द ही पूरे प्रदेश में एक बड़े आंदोलन का रूप ले लेगी।
इस महाप्रदर्शन का नेतृत्व करने और अपनी आवाज बुलंद करने वालों में धीरज अग्रवाल, एम.के. मसीह, अशोक देशमुख, सूर्यप्रभा चेटियार, तरुण भांडे, भूपेश चौधरी, सोमन साहू, चुडामणी साहू, मोहन सोनी, गजेंद्र पटेल, विशेष लखोटिया, बसंत गजेंद्र, मुकेश राव नन्नावरे, गोपाल साहू, राकेश साहू, पवन साहू, डॉ. अवधेश सिंह मौर्य, महेंद्र यादव, हितेंद्र साहू, कमलेश राठौर, दिनेश पूरी गोस्वामी, नीलू चंद्राकर, तिहारूराम सिन्हा और पारख दास मानिकपुरी सहित भारी संख्या में शिक्षाविद् और स्कूल स्टाफ मौजूद रहा।
