बिलासपुर. छत्तीसगढ़ के बहुचर्चित मस्तूरी गोलीकांड में फरार चल रहे मुख्य साजिशकर्ताओं की धरपकड़ के लिए पुलिस ने ‘मिशन मिडनाइट’ के तहत बड़ी कार्रवाई की है. पुलिस की एक विशेष टीम ने सशस्त्र बलों और डॉग स्क्वायड के साथ इनामी आरोपी नागेंद्र राय के ठिकाने पर दस्तक दी. हालांकि, करीब ढाई घंटे की कड़ी मशक्कत और घर के कोने-कोने की तलाशी के बाद भी मुख्य आरोपी का कोई सुराग नहीं मिल सका.
खुफिया इनपुट के आधार पर पुलिस की टीम बीती रात करीब एक बजे तोरवा क्षेत्र के लालखदान-महमंद पहुंची. भारी पुलिस बल ने पूरे इलाके को घेर लिया था. एसएसपी रजनेश सिंह के निर्देश पर पुलिस नागेंद्र राय के घर में दाखिल हुई. सर्च ऑपरेशन के दौरान डॉग स्क्वायड ने घर के अंदर और आसपास के संवेदनशील हिस्सों की सघन जांच की.
छापेमारी के दौरान पुलिस को भारी विरोध का सामना करना पड़ा. आरोपी नागेंद्र राय के बेटे, भतीजे और अन्य परिजनों ने आधी रात की कार्रवाई पर आपत्ति जताते हुए पुलिस अधिकारियों से तीखी बहस की. पुलिस के काम में बाधा डालने और सर्चिंग रोकने की कोशिश करने के आरोप में तोरवा पुलिस ने परिजनों के खिलाफ ‘शासकीय कार्य में बाधा’ डालने का मामला दर्ज कर लिया है.
मस्तूरी गोलीकांड के बाद से ही नागेंद्र राय और टाकेश्वर पाटले फरार हैं. एसएसपी रजनेश सिंह ने दोनों पर 5-5 हजार रुपये का इनाम घोषित कर रखा है. पुलिस को शक था कि नागेंद्र राय घर में छिपा हो सकता है, लेकिन सफलता न मिलने पर अब आशंका जताई जा रही है कि वह राज्य से बाहर भाग गया है.
यह पूरा मामला 29 अक्टूबर का है, जब मस्तूरी बस स्टैंड पर जनपद उपाध्यक्ष नीतेश सिंह के ऑफिस पर बाइक सवार नकाबपोशों ने अंधाधुंध फायरिंग की थी. नीतेश सिंह ने भी जवाबी फायरिंग की, जिससे हमलावर भाग खड़े हुए. जांच में खुलासा हुआ कि यह पूरी वारदात आपसी रंजिश और वर्चस्व की लड़ाई का परिणाम थी, जिसकी पटकथा नागेंद्र राय और टाकेश्वर पाटले ने मिलकर लिखी थी.
इस मामले में पुलिस अब तक कांग्रेस नेता अकबर खान और युवा कांग्रेस नेता विश्वजीत अनंत समेत 11 लोगों को सलाखों के पीछे भेज चुकी है, लेकिन मुख्य साजिशकर्ता अब भी पुलिस की पहुंच से दूर हैं.
