राजनांदगांव। छत्तीसगढ़ के राजनांदगांव की सुप्रसिद्ध समाजसेविका और पद्मश्री सम्मान से सम्मानित फुलबासन बाई यादव के अपहरण की सनसनीखेज कोशिश ने पूरे प्रदेश को झकझोर कर रख दिया है, लेकिन पुलिस की मुस्तैदी ने अपराधियों के मंसूबों पर पानी फेर दिया। इस पूरी साजिश की मास्टरमाइंड बेमेतरा की खुशबू साहू निकली, जो फुलबासन बाई जैसी आर्थिक संपन्नता और सामाजिक प्रतिष्ठा रातों-रात हासिल करने के लालच में इस खौफनाक वारदात को अंजाम देने निकली थी।
पुलिस अधीक्षक अंकिता शर्मा के अनुसार, खुशबू खुद भी महिला समूहों से जुड़ी है और वह चाहती थी कि फुलबासन बाई को बंधक बनाकर या उनके जरिए अपने प्रभाव का इस्तेमाल कर वह महिला स्वयं सहायता समूहों की निर्विवाद अध्यक्ष बन जाए। मंगलवार सुबह खुशबू अपने चार साथियों सलोनी महेश्वरी, चिनक राम साहू, गोपाल खेलवार और ड्राइवर दिनेश बंजारे के साथ किराए की स्कॉर्पियो लेकर राजनांदगांव पहुंची थी। करीब साढ़े दस बजे इन आरोपितों ने फुलबासन यादव के घर धावा बोला और उन्हें जबरन वाहन में बिठाकर ले जाने की कोशिश की।
हालांकि, इनकी बदकिस्मती और पुलिस की सतर्कता का मेल खैरागढ़ रोड पर देखने को मिला, जहाँ यातायात पुलिस की रूटीन चेकिंग चल रही थी। संदिग्ध हलचल दिखने पर जब पुलिस ने वाहन रोका, तो पूरी सच्चाई सामने आ गई। सुकुलदैहान चौकी में हुई 10 घंटे की कड़ी पूछताछ के बाद खुशबू ने अपना गुनाह कुबूल कर लिया कि वह फुलबासन बाई के जरिए विशेष पहचान और रसूख कायम करना चाहती थी। इस घटना की गंभीरता को देखते हुए पुलिस प्रशासन ने फुलबासन बाई की सुरक्षा तत्काल प्रभाव से बढ़ा दी है, वहीं आईजी बालाजी राव और एसपी अंकिता शर्मा ने जांबाज पुलिसकर्मियों को पुरस्कृत करने का ऐलान किया है।
