धमतरी। छत्तीसगढ़ के धमतरी जिले से एक बेहद सनसनीखेज और कानून-व्यवस्था को चुनौती देने वाली खबर सामने आई है, जहां सालों से जंगलों का सीना चीरकर अवैध कब्जा करने वाले अतिक्रमणकारियों ने खाकी और सरकारी तंत्र पर सीधा हमला बोल दिया। उदंती सीतानदी टाइगर रिजर्व के कोर एरिया में एक लाख से अधिक पेड़ों की बेरहमी से कटाई करने वाले आरोपियों को गिरफ्तार करने पहुंची वन विभाग की टीम पर ग्रामीणों की उग्र भीड़ ने जानलेवा हमला कर दिया।
इस हमले में उदंती सीतानदी अभ्यारण्य के उपनिदेशक और डीएफओ (DFO) वरुण जैन किसी तरह अपने कर्मचारियों की मदद से जान बचाकर निकलने में कामयाब रहे। सिहावा थाना क्षेत्र के अतिसंवेदनशील ग्राम जैतपुरी में सोमवार दोपहर हुई इस वारदात ने प्रशासनिक हलकों में हड़कंप मचा दिया है। चौंकाने वाली बात यह रही कि इतनी बड़ी कार्रवाई के दौरान मौके पर सुरक्षा के लिए पुलिस बल मौजूद नहीं था, जिससे वन विभाग की टीम सीधे तौर पर उग्र भीड़ के निशाने पर आ गई। बाद में जब घटना की सूचना पाकर पुलिस की कुमुक मौके पर पहुंची, तब जाकर कहीं हालात पर काबू पाया जा सका और पुलिस ने मुस्तैदी दिखाते हुए छह से अधिक उपद्रवियों को हिरासत में ले लिया।
यह पूरा विवाद उस वक्त भड़का जब डीएफओ वरुण जैन अपनी टीम के साथ जैतपुरी गांव पहुंचे थे। दरअसल, वन विभाग के सैटेलाइट इमेजरी और ड्रोन सर्वे से एक ऐसा डरावना खुलासा हुआ था, जिसने महकमे की नींद उड़ा दी थी। रिपोर्ट के मुताबिक, सीतानदी टाइगर रिजर्व के कोर वन्यप्राणी क्षेत्र और महानदी के कैचमेंट इलाके में पिछले 15 वर्षों के भीतर करीब 1 लाख पेड़ों की अवैध कटाई कर 106 हेक्टेयर (265 एकड़) बेशकीमती वन भूमि पर कब्जा कर लिया गया था। चौंकाने वाली बात यह है कि वर्ष 2011 में जहां सिर्फ 45 हेक्टेयर में अतिक्रमण था, वह अगले 10 वर्षों में बढ़कर दोगुने से अधिक हो गया।
जांच में यह भी सामने आया कि जिस जंगल में पहले प्रति हेक्टेयर करीब 1000 पेड़ हुआ करते थे, वहां अब सिर्फ 25 से 50 पेड़ ही बचे हैं, यानी खेती के लिए पूरे के पूरे जंगल को मरुस्थल में बदल दिया गया। इस संगीन अपराध में ग्राम जैतपुरी के 166 ग्रामीणों के खिलाफ वन अधिनियम के तहत मामले दर्ज किए गए हैं। विडंबना यह है कि इन सभी अतिक्रमणकारियों के पास पहले से ही राजस्व क्षेत्र में अपनी निजी जमीन मौजूद है, इसके बावजूद लालच में आकर उन्होंने सरकारी जंगल को तबाह कर दिया।
इस हिंसक झड़प के बाद मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस और वन विभाग ने सख्त रुख अपना लिया है। डीएफओ वरुण जैन ने बताया कि स्थिति अब नियंत्रण में है और पांच से छह लोगों को गिरफ्तार कर आगे की कानूनी कार्रवाई की जा रही है। उन्होंने स्पष्ट किया कि इन सभी 166 आरोपियों को पहले ही बेदखली का नोटिस जारी किया जा चुका था और कोर्ट भी इनकी अग्रिम जमानत याचिका को सिरे से खारिज कर चुका है।
इसके बावजूद कानून को हाथ में लेकर सरकारी अधिकारियों पर हमला करना बेहद निंदनीय है। यदि सिहावा पुलिस मौके पर पहुंचने में थोड़ी भी देर करती, तो जैतपुरी गांव में एक बड़ी और भयावह अनहोनी से इंकार नहीं किया जा सकता था। फिलहाल, इस हमले के बाद वन विभाग और पुलिस प्रशासन मिलकर अन्य फरार आरोपियों की धरपकड़ के लिए इलाके में दबिश दे रहे हैं।
