अम्बिकापुर। छत्तीसगढ़ के अम्बिकापुर नगर निगम की सामान्य सभा में शहरी क्षेत्र और आवासीय इलाकों में सूअर पालन पर पूर्ण प्रतिबंध का प्रस्ताव पारित हुए करीब 16 साल बीत चुके हैं। इसके बावजूद शहर के कई मोहल्लों में आज भी खुलेआम सूअर पालन जारी है। इससे नगर निगम की कार्रवाई और जिम्मेदार अधिकारियों की कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं।
शहर के सत्तीपारा, नमना कला सहित कई बस्तियों में आज भी बड़ी संख्या में सूअर पाले जा रहे हैं। इनकी वजह से गलियों और नालियों में गंदगी फैली रहती है, जिससे आसपास रहने वाले लोगों को बदबू, संक्रमण और स्वास्थ्य संबंधी परेशानियों का सामना करना पड़ता है।
स्थानीय लोगों का आरोप है कि नगर निगम के कुछ अधिकारी-कर्मचारियों और जनप्रतिनिधियों की कथित सांठगांठ के कारण प्रतिबंध के बावजूद यह अवैध गतिविधि वर्षों से जारी है। यही वजह है कि नियम सिर्फ फाइलों तक सीमित होकर रह गए हैं।
क्या था निगम का आदेश?
24 मार्च 2015 को नगर निगम की सामान्य सभा में शहरी और आवासीय क्षेत्रों में सूअर पालन पर पूर्ण प्रतिबंध लगाने का प्रस्ताव पारित किया गया था। उस समय स्वाइन फ्लू जैसी संक्रामक बीमारियों के खतरे और शहर की स्वच्छता व्यवस्था को देखते हुए यह फैसला लिया गया था।
प्रस्ताव के बाद एसडीएम कोर्ट के आदेश पर सूअर पालकों को नोटिस जारी कर शहर की सीमा से सूअर हटाने के निर्देश दिए गए थे। साथ ही आदेश का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराने और नगर निगम के सफाई अमले को सूअरों को पकड़कर शहर से बाहर अथवा कांजी हाउस भेजने के निर्देश भी दिए गए थे।
अब सबसे बड़ा सवाल?
जब नगर निगम का प्रतिबंध, सामान्य सभा का प्रस्ताव, एसडीएम कोर्ट के आदेश और एफआईआर के निर्देश पहले से मौजूद हैं, तो आखिर शहर के कई इलाकों में आज भी अवैध सूअर पालन किसके संरक्षण में चल रहा है?
क्या नगर निगम एक बार फिर इस मामले में सख्त कार्रवाई करेगा, या फिर यह प्रतिबंध केवल सरकारी दस्तावेजों तक ही सीमित रहेगा?
