अम्बिकापुर। शहर के प्रतीक्षा बस स्टैंड के पास स्थित बेशकीमती जमीन और प्राकृतिक जलक्षेत्र (तालाब) को फर्जीवाड़े की भेंट चढ़ाने वाले भू-माफियाओं के खिलाफ प्रशासन ने कड़ा शिकंजा कस दिया है। खसरा क्रमांक 3714 की जमीन पर अवैध प्लाटिंग और आदिवासियों की भूमि के कूटरचित अंतरण के मामले में सरगुजा कलेक्टर ने सख्त रुख अख्तियार करते हुए तहसीलदार को सभी संलिप्त व्यक्तियों के खिलाफ तत्काल प्राथमिकी (एफआईआर) दर्ज कराने के निर्देश जारी किए हैं। इसके साथ ही विवादित भूमि को शासन के अधीन लेने (शासकीयकरण) की विधिवत कानूनी प्रक्रिया भी शुरू की जा रही है।
पूरा मामला तब उजागर हुआ जब स्थानीय नागरिकों ने प्रतीक्षा बस स्टैंड क्षेत्र के उस जलभराव वाले हिस्से को पाटकर बेचे जाने की शिकायत दर्ज कराई, जिसका उपयोग लंबे समय से आम जनता निस्तारी और दैनिक कार्यों के लिए तालाब के रूप में करती आ रही थी। जनहित से जुड़ी इस गंभीर शिकायत पर त्वरित संज्ञान लेते हुए कलेक्टर ने अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व) को मामले की विस्तृत जांच सौंपी थी।
एसडीएम की जांच रिपोर्ट में भू-माफिया और राजस्व कर्मियों की मिलीभगत से रची गई एक सुनियोजित और सनसनीखेज धोखाधड़ी की परतें खुलीं। राजस्व रिकॉर्ड के मुताबिक, वर्ष 1954-55 से पहले यह जमीन अनुसूचित जनजाति वर्ग के जैलाल (पिता बोधन, जाति गोंड़) के नाम दर्ज थी। इस बेशकीमती जमीन को हड़पने के लिए एक संगठित षड्यंत्र रचा गया, जिसमें नगर पालिक निगम अम्बिकापुर के नाम से जैलाल का 23 अप्रैल 1976 की तिथि में एक फर्जी मृत्यु प्रमाण पत्र पेश कर दिया गया। जब निगम से इसका सत्यापन कराया गया, तो खुलासा हुआ कि ऐसा कोई प्रमाण पत्र कभी जारी ही नहीं हुआ था और न ही रिकॉर्ड में दर्ज था।
धोखाधड़ी की इंतहा यहीं नहीं रुकी; अमलभिट्ठी के तत्कालीन पटवारी ने एक अन्य व्यक्ति ‘जैलाल पिता देवराम’ के वारिसों की सूची तैयार की थी, जिसे शातिराना तरीके से मूल खातेदार ‘जैलाल पिता बोधन’ का वारिस बताकर राजस्व दस्तावेजों में फौती नामांतरण का अवैध खेल खेला गया। आदिवासियों के अधिकारों का हनन करते हुए जाली दस्तावेजों के सहारे जमीन की रजिस्ट्री और अवैध प्लाटिंग का रास्ता साफ किया गया।
जांच प्रतिवेदन में इस महाघोटाले के प्रमुख सूत्रधारों के रूप में चन्द्रशेखर यादव (पिता स्व. जगतपाल यादव) और आजाद इराकी (पिता रियाजुद्दीन इराकी) की संलिप्तता स्पष्ट रूप से रेखांकित की गई है। इसके अलावा फर्जी विक्रेताओं के रूप में नोहरसाय, रामकुमार, श्रीलाल, पूर्णिमा, जनकुंवर, चन्द्रभान यादव एवं मीरा यादव की भूमिका सामने आई है। इतना ही नहीं, तत्कालीन ग्राम पंचायत अमलभिट्ठी के सरपंच और सचिव की कार्यप्रणाली भी संदेह के दायरे में पाई गई है। कलेक्टर ने इस संगठित फर्जीवाड़े पर बिना किसी देरी के एफआईआर दर्ज कर तत्काल अनुपालन रिपोर्ट प्रस्तुत करने का आदेश दिया है, जिससे प्रशासनिक गलियारों और भू-माफियाओं में हड़कंप मच गया है।
