अम्बिकापुर। सूरजपुर में प्रधान आरक्षक की बेबस पत्नी और मासूम 11 वर्षीय बेटी की बेरहमी से जान लेने वाले दरिंदों के घमंड को कानून ने एक ही झटके में मिट्टी में मिला दिया। दोहरे हत्याकांड के बहुचर्चित मामले में फास्ट ट्रैक कोर्ट ने मुख्य आरोपी कुलदीप साहू समेत तीन दोषियों को सीधे फांसी के तख्ते तक पहुंचाने का फरमान सुना दिया, जबकि चौथे दोषी को जिंदगी भर जेल में सड़ने (उम्रकैद) की सजा दी।
कुछ ही दिन पहले तक पुलिस अभिरक्षा में मीडिया कैमरों को देखकर बेशर्मी से मुस्कुराने और अकड़ दिखाने वाला कुलदीप साहू जैसे ही वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग पर मौत की सजा का फैसला सुना, उसका सारा गुरूर हवा हो गया। जिस चेहरे पर कल तक क्रूरता और हेकड़ी नाच रही थी, वहां सिर्फ मौत की दहशत और पीलापन साफ नजर आया।
सूरजपुर के इस रोंगटे खड़े कर देने वाले दोहरे हत्याकांड में फास्ट ट्रैक कोर्ट ने मुख्य दोषी कुलदीप साहू के साथ चंद्रकांत चौधरी उर्फ सीके और फूल सिंह उर्फ रिंकू को फांसी की सजा मुकर्रर की है, वहीं सहयोगी आर्यन विश्वकर्मा उर्फ गोल्डी को उम्रकैद सुनाई गई है। फैसले की घड़ी में कोर्ट परिसर भारी गहमागहमी के बीच इंसाफ की गूंज से भर उठा, जहां पीड़ित परिवार ने भी इस कड़े फैसले पर न्याय मिलने का सुकून जाहिर किया।
अम्बिकापुर सेंट्रल जेल के अधीक्षक अक्षय सिंह राजपूत ने पुष्टि की कि वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए कोर्ट में पेश किए जाने के दौरान जब कुलदीप साहू को फांसी की सजा से अवगत कराया गया, तो उसके पैरों तले जमीन खिसक गई। जेल स्टाफ के अनुसार, जो अपराधी पहले पेशियों के दौरान मुस्कुराकर पोज दे रहा था, सजा सुनते ही उसके चेहरे के भाव पूरी तरह बदल गए और वहां खौफ साफ तैर रहा था।
अधीक्षक के मुताबिक, प्रदेश में फांसी की मुकम्मल व्यवस्था रायपुर सेंट्रल जेल में होने के कारण न्यायालय से विधिवत अनुमति लेकर दोषियों को रायपुर शिफ्ट करने की कानूनी कवायद शुरू कर दी गई है। इसके साथ ही, सजा सुनते ही सदमे और भय में घिरे कुलदीप साहू की निगरानी और जेल सुरक्षा को कड़ा कर दिया गया है, ताकि वह कोई अप्रिय कदम न उठा सके।
