अम्बिकापुर। एक साल से गुमशुदा बेटी जब अचानक अपने पिता के सामने आई, तो उस मजदूर पिता की पथराई आंखों से खुशी के आंसू छलक पड़े। मानसिक रूप से अस्वस्थ होने के कारण जो युवती अपने घर और परिजनों का नाम तक नहीं बता पा रही थी, वह अम्बिकापुर के शासकीय नारी निकेतन की संवेदनशीलता और अथक प्रयासों की बदौलत आखिरकार अपने परिवार से मिल गई।
लगभग छह महीने पहले गौरेला-पेंड्रा-मरवाही जिले के ‘सखी वन स्टॉप सेंटर’ के माध्यम से 35 वर्षीय इस महिला को अम्बिकापुर स्थित नारी निकेतन लाया गया था। उस समय उसकी मानसिक स्थिति बेहद नाजुक थी और वह अपने बारे में कुछ भी स्पष्ट बताने में असमर्थ थी। नारी निकेतन की अधीक्षक डॉ. खुशबू तिवारी और उनकी टीम ने न केवल छह महीनों तक उसका समुचित इलाज और संवेदनशील देखभाल सुनिश्चित की, बल्कि लगातार उससे संवाद साधने का प्रयास भी जारी रखा।
इलाज के दौरान जब महिला की स्थिति में आंशिक सुधार हुआ, तो उसने बातचीत में केवल ‘ओडिशा’ का जिक्र किया। इस छोटे से सुराग को आधार बनाकर नारी निकेतन प्रबंधन ने पुलिस और स्थानीय प्रशासन के समन्वय से ओडिशा के सीमावर्ती इलाकों में छानबीन शुरू की। लगातार संपर्क और पड़ताल के बाद पुष्टि हुई कि महिला लगभग एक वर्ष पूर्व ओडिशा के करंजिया थाना क्षेत्र से लापता हुई थी।
परिजनों से संपर्क कर उन्हें अम्बिकापुर बुलाया गया। नारी निकेतन परिसर में जब साल भर बाद पिता और बेटी का आमना-सामना हुआ, तो वहां मौजूद हर शख्स की आंखें नम हो गईं। सभी कानूनी और औपचारिक प्रक्रियाएं पूरी कर युवती को सकुशल उसके परिजनों को सौंप दिया गया। नारी निकेतन की इस मानवीय पहल ने न केवल एक लाचार पिता को उसकी खोई हुई बेटी लौटाई, बल्कि यह भी साबित किया कि संवेदना और कर्तव्यनिष्ठा मिलकर किसी भी बिखरे परिवार में दोबारा उम्मीद की रोशनी भर सकते हैं।
