जशपुर। किसानों की गाढ़ी कमाई पर डाका डालने वाले खाद माफियाओं और कालाबाजारियों के खिलाफ जशपुर जिला प्रशासन ने अपनी आंखें तल्ख कर ली हैं। कलेक्टर रोहित कुमार व्यास के कड़े तेवरों के बाद जिले में नकली उर्वरक बेचने, जमाखोरी करने और तय दाम से अधिक वसूलने वालों के खिलाफ एक बड़ा चौतरफा अभियान छेड़ दिया गया है। इसी कड़ी में बगीचा विकासखंड में कृषि विभाग की टीम ने अचानक धावा बोलकर बिना लाइसेंस और बिना पीओएस (POS) मशीन के धड़ल्ले से चल रहे अवैध उर्वरक खेल का भंडाफोड़ किया है। प्रशासन ने न सिर्फ मौके से भारी मात्रा में अवैध खाद का जखीरा जब्त किया, बल्कि इसकी बिक्री पर भी तत्काल प्रभाव से ताला जड़ दिया है।
इस पूरी सर्जिकल स्ट्राइक को बगीचा विकासखंड की एक हाई-प्रोफाइल टीम ने अंजाम दिया, जिसमें वरिष्ठ कृषि विकास अधिकारी लालसाय केरकेट्टा, कृषि विकास अधिकारी व उर्वरक निरीक्षक क्रुसलीना मिंज और स्थानीय ग्रामीण कृषि विस्तार अधिकारी शामिल रहे। टीम जब ग्राम सुलेसा पहुंची, तो वहां मनोज जायसवाल नाम का व्यवसायी बिना किसी वैध लाइसेंस के खुलेआम खाद बेचता रंगे हाथों पकड़ा गया। अधिकारियों ने बिना देर किए उर्वरक (नियंत्रण) आदेश, 1985 के खंड-28 के तहत अपने विशेषाधिकारों का इस्तेमाल करते हुए मौके से 35 बोरी डीएपी (DAP), 10 बोरी सुपर फॉस्फेट और 7 बोरी यूरिया समेत कुल 52 बोरी अवैध उर्वरक को तत्काल जब्त कर लिया। इसके साथ ही पूरी खेप को सुपुर्दनामा में लेकर उसके क्रय-विक्रय पर पूरी तरह बैन लगा दिया गया है।
प्रशासन की यह कार्रवाई यहीं नहीं थमी। टीम ने जब बगीचा के ही सन्ना स्थित ‘किसान कृषि केंद्र’ पर दबिश दी, तो वहां नियमों को ताक पर रखकर बिना पीओएस मशीन के उर्वरक की बिक्री की जा रही थी। डिजिटल रिकॉर्ड से बचने की इस चालाकी पर पानी फेरते हुए अधिकारियों ने मौके पर मौजूद 27 बोरी डीएपी उर्वरक को जब्त कर दुकान संचालक के होश उड़ा दिए। कृषि विभाग के आला अफसरों का साफ कहना है कि यह महज शुरुआत है; इन दोनों मामलों की बारीकी से जांच की जा रही है और जैसे ही विस्तृत रिपोर्ट सामने आएगी, दोषियों के खिलाफ सीधे थाने में एफआईआर (FIR) दर्ज कराकर उन्हें जेल की सलाखों के पीछे भेजा जाएगा। उप संचालक कृषि ने दो टूक लहजे में चेतावनी दी है कि जिले में खाद की कालाबाजारी या किसानों का शोषण किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं होगा और नियमों का उल्लंघन करने वाले हर छोटे-बड़े व्यापारी पर इससे भी ज्यादा कठोर कानूनी चाबुक चलना तय है।
