धमतरी। छत्तीसगढ़ के धमतरी स्थित उदंती-सीतानदी टाइगर रिजर्व के घने जंगलों से वन्यजीव प्रेमियों और वन विभाग के लिए एक बेहद सुखद और ऐतिहासिक खबर आई है। पिछले आठ वर्षों के लंबे और सुनसान इंतजार के बाद आखिरकार इस रिजर्व क्षेत्र में एक बाघिन की धमक दर्ज की गई है। जंगल में लगाए गए ट्रैप कैमरों ने न केवल इस बाघिन की स्पष्ट तस्वीरें और वीडियो फुटेज कैद किए हैं, बल्कि वन विभाग के अधिकारियों और कर्मचारियों के चेहरों पर बरसों बाद एक बड़ी मुस्कान भी लौटा दी है। वन्यजीव विशेषज्ञ इसे मध्य भारत में बाघ संरक्षण की दिशा में एक टर्निंग पॉइंट और बहुत बड़ी उपलब्धि मान रहे हैं।
आमतौर पर इस रिजर्व में भालू, हिरण, तेंदुआ और दुर्लभ उल्लुओं की गतिविधियां तो अक्सर रिकॉर्ड होती रहती थीं, लेकिन बाघों का कुनबा बढ़ाने के लिए जरूरी ‘मादा बाघ’ की कमी पिछले आठ साल से खल रही थी। इस बार ट्रैप कैमरों में दर्ज हुई बाघिन की नियमित आवाजाही ने यह साबित कर दिया है कि इस जंगल का पारिस्थितिकी तंत्र अब वन्यजीवों के अनुकूल हो चुका है। विशेषज्ञों का मानना है कि किसी भी रिजर्व में बाघिन की उपस्थिति वहां के इकोसिस्टम के पूरी तरह स्वस्थ होने का सबसे बड़ा प्रमाण है। लंबे समय से यहां किसी मादा बाघ के न होने से बाघों का स्थायी बसेरा नहीं बन पा रहा था, लेकिन अब इस नई दस्तक से भविष्य में बाघों के कुनबे के विस्तार और सफल प्रजनन की उम्मीदें 100 गुना बढ़ गई हैं।
इस ऐतिहासिक सफलता पर बात करते हुए टाइगर रिजर्व के डिप्टी डायरेक्टर वरुण जैन ने बताया कि वन विभाग की टीमें अब पूरी तरह अलर्ट मोड पर हैं। कैमरा ट्रैप और ग्राउंड-लेवल फील्ड मॉनिटरिंग के जरिए बाघिन की हर हरकत और उसकी सुरक्षित आवाजाही पर 24 घंटे पैनी नजर रखी जा रही है। विभाग का मुख्य उद्देश्य इस बाघिन को पूरी तरह से सुरक्षित आवास और शिकार के लिए अनुकूल वातावरण देना है ताकि वह इसी जंगल को अपना स्थायी घर बना ले। अगर संरक्षण के ये प्रयास इसी रफ्तार से आगे बढ़े, तो वह दिन दूर नहीं जब उदंती-सीतानदी टाइगर रिजर्व देश के नक्शे पर बाघों की सबसे सुरक्षित और पसंदीदा शरणस्थली के रूप में उभरकर सामने आएगा।
