अब हर व्यक्ति को सात किलो चावल, 35 किलो चावल की योजना हुई बंद

रायपुर. राज्य में सस्ता चावल बांटने की योजना में मंगलवार को बड़ा बदलाव कर दिया गया। अब हर व्यक्ति को सात किलो चावल दिया जाएगा। न कि हर परिवार को 35 किलो चावल। यानी परिवार में दो सदस्य हैं तो उन्हें एक रुपए प्रति किलो की दर से 14 किलो चावल मिलेगा और 10 सदस्य हैं तो 70 किलो। दावा किया जा रहा है कि इस फेरबदल से बोगस राशनकार्ड के खेल पर अंकुश लगेगा। यह व्यवस्था राज्य के 44 लाख परिवारों के 67 लाख लोगों के लिए 1 अप्रैल से लागू कर दी जाएगी।
हर परिवार को 35 किलो चावल देने की योजना पिछले आठ सालों से चली आ रही थी। पर राज्य सरकार और खाद्य विभाग लंबे अरसे से बोगस राशन कार्ड और उनकी मान्यता को लेकर राजनीतिक विरोध झेल रहे थे। विधानसभा चुनाव के पहले राशन कार्ड बनाने और उसके बाद राशन कार्ड निरस्त करने के मामले में पूरे राज्य में धरना प्रदर्शन और आंदोलन हुए हैं।
अब तक यह हो रहा था
अब तक प्रति परिवार हर महीने 35 किलो अनाज की जो व्यवस्था की गई थी, उसके मुताबिक यदि किसी परिवार में सदस्य संख्या दो है तो उसे भी 35 किलो व सदस्य संख्या दस है तो उस परिवार को भी 35 किलो मिल रहा था। एक या दो सदस्य वाले परिवारों को हर महीने 35 किलो अनाज की जरूरत नहीं होती और आवश्यकता से ज्यादा अनाज मिलने पर उसके दुरूपयोग की भी संभावना रहती थी।

 

 असर

 

सबसे पहले राशन कार्ड पर चल रहा घमासान खत्म होगा।
राशनकार्ड बोगस बताकर निरस्त किए जा रहे थे, उस पर रोक।
एक ही परिवार में कई राशन कार्ड जा रहे चावल पर रोक।
इससे चावल की कालाबाजारी पर रोक लगेगी।
परिवारों में सदस्य संख्या का विवाद समाप्त होगा।

मायने

सरकार पर सस्ते चावल योजना से आर्थिक बोझ बढ़ रहा था।
केंद्र सब्सिडी वाली योजनाओं पर अंकुश लगाना चाहता है।
इसी वजह से राज्य की चावल योजना में बदलाव किया गया है।
राज्य पर बढ़ते अार्थिक बोझ को कम करने के लिए इस साल किसानों को धान खरीदी पर बोनस भी नहीं दिया गया।
 1200 करोड़ रुपए की होगी बचत
हर परिवार को 35 किलो चावल देने की योजना पर औसतन हर साल 22 लाख 70 हजार टन चावल की जरूरत पड़ती थी। अब हर साल 18 लाख टन चावल की जरूरत पड़ेगी। इससे राज्य शासन पर सब्सिडी में होने वाले खर्च में करीब 1200 करोड़ रुपए की बचत होगी। फिलहाल करीब 4200 करोड़ रुपए इस योजना की सब्सिडी के लिए बजट में रखे गए हैं।