नई दिल्ली। लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष और कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने आठ साल पुराने एक मानहानि मामले में कानूनी मोर्चे पर बड़ा कदम उठाते हुए मध्य प्रदेश हाईकोर्ट में लिखित रूप से खेद व्यक्त किया है। यह पूरा विवाद साल 2018 के मध्य प्रदेश विधानसभा चुनाव प्रचार के दौरान का है, जब राहुल गांधी ने झाबुआ में एक जनसभा को संबोधित करते हुए पनामा पेपर्स लीक मामले में तत्कालीन मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के बेटे कार्तिकेय सिंह चौहान के नाम का जिक्र किया था।
इस बयान को अपनी सामाजिक प्रतिष्ठा के खिलाफ बताते हुए कार्तिकेय चौहान ने भोपाल की विशेष एमपी-एमएलए कोर्ट में मानहानि का परिवाद दायर किया था, जिस पर संज्ञान लेते हुए अदालत ने राहुल गांधी को 25 जून को व्यक्तिगत रूप से पेश होने का समन जारी किया था। इसी समन से व्यक्तिगत छूट पाने और मामले की कार्यवाही को चुनौती देने के लिए राहुल गांधी ने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया है।
इस हाई-प्रोफाइल मामले में बुधवार को जस्टिस प्रमोद कुमार अग्रवाल की एकलपीठ के सामने एक नया मोड़ तब आया, जब राहुल गांधी के वकील ने कोर्ट में एक लिखित आवेदन प्रस्तुत कर स्पष्ट किया कि वह बयान जानबूझकर पूर्व मुख्यमंत्री के परिवार के खिलाफ नहीं दिया गया था, बल्कि यह केवल एक गलतफहमी का परिणाम था। राहुल गांधी की ओर से आए इस लिखित स्पष्टीकरण और खेद जताने वाले आवेदन को रिकॉर्ड पर लेते हुए हाईकोर्ट ने अब शिकायतकर्ता कार्तिकेय चौहान को अपनी लिखित प्रतिक्रिया दर्ज कराने के निर्देश दिए हैं।
कानूनी और राजनीतिक गलियारों में इस सुनवाई को बेहद अहम माना जा रहा है क्योंकि एमपी-एमएलए कोर्ट द्वारा तय की गई 25 जून की तारीख के मद्देनजर हाईकोर्ट आज गुरुवार को विस्तृत सुनवाई के बाद अपना कोई बड़ा फैसला सुना सकता है, जिस पर सबकी निगाहें टिकी हुई हैं।
